पीएमएवाई-जी के तहत 4.18 करोड़ आवासों का लक्ष्य, 1.21 करोड़ घरों का निर्माण पूरा

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत पिछले पांच वित्तीय वर्षों में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को 2.13 करोड़ आवासों का लक्ष्य आवंटित किया गया, जिसके मुकाबले 1.95 करोड़ आवास स्वीकृत किए गए और 1.21 करोड़ आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने मंगलवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
पांच साल में 1.31 लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान पीएमएवाई-जी के तहत राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को कुल 1,31,100.02 करोड़ रुपए का केंद्रीय अंश जारी किया गया। इस अवधि में केंद्रीय और राज्य दोनों अंशों को मिलाकर योजना के तहत कुल 2,17,896.40 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
2029 तक 4.95 करोड़ आवास बनाने का लक्ष्य
ग्रामीण क्षेत्रों में सभी के लिए आवास के उद्देश्य से ग्रामीण विकास मंत्रालय 1 अप्रैल 2016 से पीएमएवाई-जी लागू कर रहा है। योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के आवास के निर्माण के लिए सहायता दी जाती है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2029 तक 4.95 करोड़ आवासों के निर्माण में सहायता प्रदान करना है।
राज्यों को 4.18 करोड़ आवासों का लक्ष्य
मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को कुल 4,17,83,017 यानी करीब 4.18 करोड़ आवासों का लक्ष्य आवंटित किया गया है। इनमें बिहार को 50.12 लाख, पश्चिम बंगाल को 46.69 लाख, महाराष्ट्र को 43.80 लाख, उत्तर प्रदेश को 42.77 लाख और मध्य प्रदेश को 57.74 लाख आवासों का लक्ष्य दिया गया है। छत्तीसगढ़ को 26.42 लाख और ओडिशा को 28.28 लाख आवासों का लक्ष्य आवंटित किया गया है।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा आवास निर्माणाधीन
पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, 74.59 लाख पीएमएवाई-जी आवास निर्माणाधीन हैं। इनमें महाराष्ट्र में 20.32 लाख, पश्चिम बंगाल में 11.08 लाख, मध्य प्रदेश में 9.96 लाख, बिहार में 6.75 लाख और असम में 5.82 लाख आवास निर्माणाधीन हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में 14.69 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है।
गंभीर अनियमितताओं पर रोकी गई केंद्रीय सहायता
मंत्रालय ने बताया कि पीएमएवाई-जी के तहत कुछ मामलों में निधियों का जारी होना रोका या विलंबित किया गया। ऐसा उन मामलों में किया गया, जहां योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं की सूचना मिली और संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी।
ओडिशा में सुधार के बाद फिर शुरू हुआ फंड
ओडिशा में पीएमएवाई-जी के क्रियान्वयन में अनियमितताओं की शिकायतों का राज्य सरकार और मंत्रालय द्वारा नियुक्त केंद्रीय टीमों ने जांच की। जांच में लाभार्थी चयन, निर्माण गुणवत्ता, निरीक्षण, आवासों की ब्रांडिंग और योजना के दिशा-निर्देशों के अनुपालन से जुड़ी कमियां सामने आईं। इसके बाद राज्य सरकार को सुधारात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा कृत कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। शुरुआती एटीआर संतोषजनक नहीं पाए जाने पर केंद्रीय सहायता की अगली किस्तों को रोक दिया गया था। मंत्रालय के अनुसार, बाद में राज्य सरकार ने आवश्यक सुधारात्मक और अनुशासनात्मक कदम उठाए और संतोषजनक एटीआर प्रस्तुत की। इसके बाद ओडिशा के लिए पीएमएवाई-जी की निधियां जारी करना फिर शुरू कर दिया गया।
पश्चिम बंगाल की एटीआर की जांच जारी
पश्चिम बंगाल में नवंबर 2022 में अंतिम रूप दी गई आवास+ 2018 सर्वेक्षण सूचियों से लक्ष्यों के आवंटन के बाद पीएमएवाई-जी के क्रियान्वयन में अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें मिली थीं। राष्ट्रीय स्तर की निगरानी (एनएलएम) टीमों और वरिष्ठ अधिकारियों की टीमों ने शिकायतों का सत्यापन किया। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 से केंद्रीय अंश की निधियां जारी करने पर रोक लगा दी गई। मंत्रालय के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत कृत कार्रवाई रिपोर्ट की वर्तमान में जांच की जा रही है।
