*नासिक के मूर्तिकार ने 1.25 स्क्वायर इंच में बनाईं 291 सोने की गणेश मूर्तियां*
*नासिक:* देवला के शिल्पकार भगवानदास खरोटे ने सूक्ष्म कला का अद्भुत चमत्कार कर दिखाया है। उन्होंने मात्र 1.25 स्क्वायर इंच की जगह में सोने की 291 गणेश मूर्तियां बनाई हैं।
इन 291 मूर्तियों के अलावा, खरोटे ने विभिन्न देशों और डिजाइनों से प्रेरित होकर लगभग 30 अन्य सूक्ष्म सोने की मूर्तियां भी तैयार की हैं। उनकी इन बेहद छोटी सोने की मूर्तियों के अनोखे संग्रह ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है और जल्द ही मुंबई में उनकी कलाकृतियों की एक बड़ी प्रदर्शनी आयोजित होने वाली है।
दावा किया जा रहा है कि इतने सूक्ष्म पैमाने पर इतनी बारीक कारीगरी का कोई रिकॉर्ड आज तक नहीं है, और इस संग्रह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है।
इन मूर्तियों में सराफ बप्पा, आत्मनिर्भर भारत, बाल गणेश, झूले में बैठे गणेश, कांगी तेन गणेश जैसी मूर्तियां शामिल हैं। कांगी तेन गणेश में दो गणेश मूर्तियों को एक-दूसरे को आलिंगन करते हुए दर्शाया गया है। इन मूर्तियों का आकार 9 MM से 15 MM तक है।
इसके साथ ही, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के मंत्र को अपनाते हुए विश्व नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व में शांति स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं और सभी को शांति का बोधामृत बांट रहे हैं, इस भाव को दर्शाती हुई ‘चाय वाले बप्पा’ की मूर्ति भी उन्होंने माइक्रो आकार में बनाई है।
इसके अलावा तबलावादक गणेश, शहनाई वादक गणेश, वीणा वादक गणेश, गायक गणेश, हारमोनियम बजाते हुए गणेश जैसे विभिन्न रूपों में गणेश जी को उन्होंने दर्शाया है।
खरोटे ने अपनी सूक्ष्म स्वर्ण कला की यात्रा महज एक मिलीमीटर आकार की सोने की कलाकृति से शुरू की थी। उनकी इस कला की दिवंगत शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने सराहना की थी। साथ ही पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा उन्हें इंटरनेशनल सुवर्ण शिखर अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
कला, कौशल, एकाग्रता, रचनात्मकता और आध्यात्मिकता का संगम करते हुए खरोटे ने सूक्ष्म गणेश मूर्तियों के माध्यम से भक्ति के एक अनोखे रूप को साकार किया है, जिसकी सर्वत्र प्रशंसा हो रही है।
ये मूर्तियां इतनी छोटी हैं कि इन्हें ठीक से देखने के लिए मैग्निफाइंग ग्लास या माइक्रोस्कोप की जरूरत पड़ती है। आकार में बेहद छोटी होने के बावजूद इन मूर्तियों की बारीक कारीगरी और सुंदरता देखते ही बनती है।
*बाइट: भगवानदास खरोटे, मूर्तिकार*
नासिक से संदीप द्विवेदी की रिपोर्ट
