बिहार के शाही लीची पर बंगाल का ‘बॉम्बे’ लीची पड़ रहा भारी
मुंबई में लीची की मांग में भारी बढ़ोतरी, इस साल रिकॉर्ड आवक से बाजार गुलजार
नागमणि पांडेय
नवी मुंबई, । मुंबई के फल बाजारों में इन दिनों लीची की भरपूर आवक हो रही है। पश्चिम बंगाल और बिहार से बड़ी मात्रा में लीची मुंबई पहुंच रही है, जिससे बाजार में रौनक बढ़ गई है। व्यापारियों के अनुसार पिछले 8-10 वर्षों की तुलना में इस वर्ष लीची का सीजन काफी बेहतर साबित हो रहा है और उपभोक्ताओं की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
व्यापारियों ने बताया कि वर्तमान में लीची मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल (कोलकाता) और बिहार से मुंबई लाई जा रही है। पहले बड़ी मात्रा में लीची रेल मार्ग से आती थी, लेकिन अब इसका अधिकांश परिवहन ट्रकों के माध्यम से किया जा रहा है। वहीं, उच्च गुणवत्ता और ताजगी बनाए रखने के लिए कुछ मात्रा में लीची हवाई मार्ग से भी मंगाई जाती है।
बाजार में ट्रक से आने वाली 10 किलो की लीची की पेटी 1,400 रुपये से 1,800 रुपये तक बिक रही है, जबकि हवाई मार्ग से आने वाली लीची की कीमत 2,000 रुपये से 2,600 रुपये प्रति 10 किलो बॉक्स तक पहुंच रही है।
व्यापारियों के अनुसार बंगाल और बिहार के मुजफ्फरपुर की लीची के स्वाद में विशेष अंतर नहीं है। दोनों ही किस्में स्वादिष्ट और मीठी होती हैं। हालांकि हवाई मार्ग से आने वाली लीची अधिक ताजा रहती है, जबकि ट्रकों से आने वाली लीची लंबी दूरी और भीषण गर्मी के कारण कुछ हद तक प्रभावित हो जाती है।उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर में बढ़े तापमान का असर फलों की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। ट्रकों से आने वाली लीची में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक फल खराब निकल जाते हैं, जबकि हवाई मार्ग से आने वाली लीची में यह नुकसान केवल 5 से 6 प्रतिशत तक सीमित रहता है। इसी कारण एयर कार्गो से आने वाली लीची की कीमत अधिक होती है।फल व्यापारियों का कहना है कि मुंबई में लीची की खपत पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ गई है। पहले जहां प्रतिदिन एक-दो ट्रक लीची की आवक होती थी, वहीं अब प्रतिदिन 10 से 15 ट्रक लीची बाजार में पहुंच रही है और पूरी मात्रा आसानी से बिक भी रही है। बढ़ती मांग और बेहतर आपूर्ति के चलते इस वर्ष लीची का कारोबार काफी उत्साहजनक बना हुआ है।
