नासिक मे शव रखकर एनएमसी का घेराव
सड़क पर लापरवाही से रखे पाइप ने ली 21 वर्षीय युवक की जान
नाशिक मनपा और ठेकेदार की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल; शव के साथ मनपा मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर परिजनों का धरना
नाशिक में सड़क पर लापरवाही से रखे गए पानी की पाइपलाइन के पाइप ने एक 21 वर्षीय युवक की जान ले ली। काम से घर लौट रहे सिद्धार्थ गोरे की दोपहिया सड़क पर रखे बड़े पाइप से टकरा गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल सिद्धार्थ की मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और नागरिकों ने शव को नाशिक महानगरपालिका के मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर रखकर धरना शुरू कर दिया।
सिद्धार्थ गोरे और उसका मित्र मनोज सूर्यवंशी रात में काम खत्म कर दोपहिया वाहन से घर लौट रहे थे। कृषीनगर स्थित जॉगिंग ट्रैक के पास महानगरपालिका की पानी आपूर्ति योजना का काम चल रहा था। इसी दौरान सड़क पर बड़े काले पाइप आड़े-तिरछे रखे गए थे। रात का अंधेरा और बारिश के कारण पाइप दिखाई नहीं देने से दोपहिया वाहन पाइप से जा टकराया। हादसे में सिद्धार्थ गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौत हो गई।
सुरक्षा के इंतजाम कहां थे?
परिजनों का आरोप है कि सड़क पर पाइप रखने के बावजूद वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए मौके पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई थी, न ही रिफ्लेक्टर लगाए गए थे और न ही चेतावनी देने वाले स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए गए थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सड़क पर निर्माण सामग्री रखने के दौरान सुरक्षा के जरूरी इंतजाम करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?
परिजनों और नागरिकों ने इस मामले में संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने और काम की निगरानी करने वाले महानगरपालिका के संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
मनपा मुख्यालय के बाहर शव रखकर प्रदर्शन
सिद्धार्थ की मौत के बाद परिजनों और नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने महानगरपालिका प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए शव को मनपा मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर रख दिया और धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
विकास कार्य या नागरिकों की जान से खिलवाड़?
नाशिक शहर में सड़क और पानी आपूर्ति से जुड़े विभिन्न विकास कार्य चल रहे हैं। लेकिन निर्माण कार्यों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बार-बार सवाल उठ रहे हैं। सड़क पर पाइप और अन्य निर्माण सामग्री रखते समय यदि सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं किए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर वाहन चालकों और नागरिकों के जीवन के लिए खतरा बन सकता है।
सिद्धार्थ गोरे की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या महानगरपालिका प्रशासन संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करेगा या फिर एक और हादसे की तरह यह मामला भी जांच और कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगा?
परिजनों और नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा शहर में चल रहे सभी निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
नासिक से संदीप द्विवेदी की रिपोर्ट
