नाशिक TCS धर्मांतरण मामले में बड़ा अपडेट; मुख्य पीड़िता को आरोपी दानिश तौसीफ और निदा खान ने दिखाए जाकिर नाईक , डॉ. इसरार अहमद, तारिक जमील के वीडियो; भजन सुनने से किया मना पूरे तरीके से मुस्लिम धर्म में कन्वर्ट करने की कोशिश;
नाशिक धर्मांतरण मामले में पीड़िता के बयान का एक हिस्सा जिसमें उसने यह बात कही है…
पीड़िता ने कहा ” दानिश के साथ शारीरिक संबंध बनने के कारण मुझे यह डर सताने लगा था कि वह मुझसे शादी करेगा या नहीं। साथ ही मुझे यह भी चिंता थी कि मेरे माता-पिता इस विवाह के लिए तैयार होंगे या नहीं। उस समय जब मैंने दानिश से दोबारा शादी के बारे में पूछा, तो उसने मुझसे कहा, “डरो मत, मुझ पर भरोसा रखो, अल्लाह हमारे साथ है। एक काम करो, तुम भगवान के भजन सुनना बंद कर दो और मंदिर जाना भी छोड़ दो। तुम्हें जो मानसिक तनाव है, वह कम हो जाएगा।”
ऐसा कहकर उसने मुझे तस्बीह पढ़ने के लिए कहा। इसी संदर्भ में उसने बताया, “जितना अधिक तुम अल्लाह का नाम लोगी, तुम्हारे गुनाह माफ होंगे और तुम्हारे नेक काम बढ़ेंगे। अगर तुम अस्तग़फ़ार पढ़ोगी, यानी अल्लाह से माफी मांगोगी, तो तुम्हारा मानसिक तनाव भी कम होगा।” इसके लिए उसने मुझे तारिक जमील के वीडियो देखने और उनके भाषण सुनने के लिए कहा। उसने यह भी कहा कि यदि मुझे किसी और सहायता की आवश्यकता हो, तो तौसीफ और निदा खान मेरी पूरी मदद करेंगे। डर के कारण मैंने दानिश की बात माननी शुरू कर दी।
दानिश ने मेरे एसबीआई और एचडीएफसी बैंक खातों की पूरी जानकारी मुझसे ले ली थी। उसे मेरे मोबाइल के बैंक यूपीआई पिन और बैंक में मौजूद रकम की भी जानकारी थी। दानिश ने तौसीफ और निदा को मुझे इस्लाम धर्म की जानकारी देने के लिए कहा था। इसलिए तौसीफ और निदा समय-समय पर मुझे इस्लाम धर्म के बारे में बताते रहते थे।
तौसीफ ने मुझसे कहा कि मैं अपने मोबाइल पर यूट्यूब में जाकिर नाइक और डॉ. इसरार अहमद के वीडियो खोजकर सुनूं, और मैंने उसके कहने पर ऐसा किया। उसने मुझे हिंदू धर्म की पुस्तकें, जैसे वेद आदि पढ़ने के लिए भी कहा और बताया कि उन्हें पढ़ने के बाद यदि मैं इस्लाम का अध्ययन करूंगी, तो मुझे इस्लाम धर्म अवश्य पसंद आएगा।
इसके अलावा दानिश और तौसीफ मुझे हमेशा इस्लाम से जुड़ी कहानियां सुनाते थे, जैसे सबा की कहानी, इब्राहिम की कहानी, बकरीद की कहानी, ज़मज़म के पानी का महत्व, कुर्बानी क्यों दी जाती है, कयामत के दिन क्या होगा, जन्नत की खूबसूरती कैसी है और जहन्नुम में क्या होता है आदि।
मुझे यह विश्वास दिलाया गया कि यदि मैं इस्लाम धर्म स्वीकार कर लूं, तो मेरा मानसिक तनाव कम हो जाएगा। धीरे-धीरे मैं इन बातों पर विश्वास करने लगी।
नासिक से संदीप द्विवेदी की रिपोर्ट
