देश में खाद का पर्याप्त भंडार, किसानों को नहीं होगी किल्लत- शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों, अल-नीनो की आशंका और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के बावजूद केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान मंगलवार को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि रबी सीजन में किसानों को पर्याप्त खाद, प्रमाणित बीज और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। देश में इस समय 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का भंडार है। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए किसानों को एकतरफा जिम्मेदार ठहराने का विरोध करते हुए कहा कि पराली के नाम पर किसानों को खलनायक बनाना और उन्हें प्रताड़ित करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रबी अभियान की तैयारी: 15 दिनों तक राज्यों से संवाद
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि रबी सीजन की तैयारियों के लिए पिछले 15 दिनों से जिला और राज्य स्तर पर लगातार बैठकें और विचार-विमर्श किया जा रहा था। कृषि संविधान के तहत मुख्य रूप से राज्य का विषय है, इसलिए खेती-किसानी से जुड़ी योजनाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्यों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। सम्मेलन के पहले दिन सभी राज्यों के कृषि प्रधान सचिवों, कृषि उत्पादन आयुक्तों (एपीसी) और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक चली 10 घंटे की बैठक में कृषि योजनाओं और रबी अभियान की राज्यवार समीक्षा की गई। इसके बाद विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों की मौजूदगी में उनकी प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं पर चर्चा कर राष्ट्रीय कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया।
2015 के बाद खाद्यान्न उत्पादन की वृद्धि दर में उछाल
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 2015 के बाद भारतीय कृषि के विकास में उल्लेखनीय तेजी आई है। उन्होंने बताया कि 1967 से 1995 के दौरान खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि 4.1 मिलियन टन रही, जबकि 1996 से 2014 के बीच यह घटकर 3.9 मिलियन टन रह गई। वर्ष 2015 के बाद खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि बढ़कर 8.4 मिलियन टन हो गई। उन्होंने कहा कि 2015 से पहले के दौर में कृषि की औसत विकास दर लगभग 3% थी, जो 2015 के बाद बढ़कर 4.5% हो गई। इस तरह औसत विकास दर में लगभग 50% की वृद्धि दर्ज की गई।
अल-नीनो और कम बारिश के बावजूद खरीफ की बुवाई लगभग सामान्य
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अल-नीनो की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने अप्रैल से ही आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी थीं। उन्होंने कहा कि मानसून के शुरुआती आंकड़ों में बारिश की कमी 14% थी, जो हाल के दिनों में अच्छी बारिश के बाद घटकर 12% रह गई है। कृषि विज्ञान के मानकों के अनुसार, बारिश में 19% से अधिक की कमी होने पर गंभीर सूखे की स्थिति मानी जाती है। उन्होंने कहा कि केंद्र, राज्य सरकारों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और किसानों के संयुक्त प्रयासों से खरीफ की बुवाई के रकबे में बड़ी गिरावट की आशंका टल गई। इस वर्ष बुवाई क्षेत्र में लगभग 1% की कमी दर्ज की गई है। धान के रकबे में करीब 16.32 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है। मक्का, सोयाबीन और कपास के क्षेत्र में भी कुछ कमी दर्ज की गई।
दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में बढ़ोतरी
कृषि मंत्री ने कहा कि कम बारिश के बावजूद उड़द, तुअर, बाजरा, ज्वार, तिल और सूरजमुखी जैसी फसलों के रकबे में वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इसे फसल विविधीकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत बताया। दूसरी ओर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश, बाढ़ या सूखे के कारण लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों के प्रभावित होने की प्रारंभिक सूचना मिली है। नुकसान का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है।
देश में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का भंडार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संबंधी चिंताओं पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रबी सीजन 2026-27 के लिए राज्यों ने कुल 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की मांग रखी है। इसमें यूरिया, डीएपी और एनपीके जैसे उर्वरक शामिल हैं। देश में फिलहाल 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक उपलब्ध है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह भंडार 122 लाख मीट्रिक टन था। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का आर्थिक बोझ भारतीय किसानों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। राज्यों के साथ लगातार संपर्क कर समय पर उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
22 अक्टूबर से देशभर में चलेगा ‘खेत बचाओ अभियान’
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और खेती की लागत कम करने के लिए 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा। खरीफ सीजन के दौरान प्रमुख राज्यों के दो-दो जिलों में मिट्टी परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। इसके तहत किसानों को उनकी जमीन और फसल की जरूरत के अनुसार खाद के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। मंत्री के अनुसार, इस प्रयोग से संबंधित जिलों में उर्वरक की खपत 27% तक कम हुई और 1,400 करोड़ रुपए से अधिक की बचत हुई। उन्होंने बताया कि नए अभियान के तहत आईसीएआर के वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के विशेषज्ञ, आत्मा (एटीएमए) की टीमें और केंद्र व राज्य सरकारों के अधिकारी गांवों और खेतों तक पहुंचेंगे। किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार यूरिया और डीएपी का संतुलित इस्तेमाल करने, उपलब्ध नमी के आधार पर फसलों और उन्नत किस्मों का चयन करने तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बनवाने और उसका सही उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाएगा।
रबी सीजन में 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए 362.60 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जबकि वास्तविक उत्पादन 376.56 मिलियन टन रहा। वर्ष 2026-27 के लिए देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 373.93 मिलियन टन निर्धारित किया गया है। इसमें रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि उत्पादन लक्ष्य तय करते समय जलाशयों में पानी की उपलब्धता, भूजल स्तर, मिट्टी की नमी और अल-नीनो की आशंकाओं को ध्यान में रखा गया है। कम पानी वाले क्षेत्रों में किसानों को अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सूखा और बाढ़ प्रभावित राज्यों में 3 अक्टूबर को जाएंगी केंद्रीय टीमें
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने कदम उठाए हैं। कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित प्रभावित राज्यों के आग्रह पर 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीमें भेजी जाएंगी। ये टीमें मौके पर जाकर नुकसान का आकलन करेंगी। कृषि मंत्री ने स्वयं भी प्रभावित राज्यों का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने की बात कही। उन्होंने बताया कि राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के तहत केंद्र सरकार सामान्य राज्यों के लिए 75% और राज्य सरकारें 25% राशि का योगदान करती हैं। इसके माध्यम से प्रभावित किसानों को तत्काल राहत उपलब्ध कराई जा रही है। आपदा में क्षतिग्रस्त मकानों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहायता का भी प्रावधान है। वहीं, राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) के तहत केंद्रीय टीमों के सर्वेक्षण के बाद नुकसान के आधार पर अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने पर निर्णय लिया जाएगा।
कम अवधि वाली फसलों के बीज और फसल बीमा पर जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में खेत खाली न रहें, इसके लिए कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली फसलों के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों से सुरक्षा देने के लिए फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाने पर भी लगातार काम किया जा रहा है।
एमएसपी से नीचे कीमतें जाने पर नेफेड और एनसीसीएफ करेंगी खरीद
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत दलहन और तिलहन की खरीद में राज्यों की ओर से होने वाली देरी को दूर करने के लिए निर्णय लिया गया है। यदि बाजार में इन फसलों की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे जाती हैं, तो केंद्रीय नोडल एजेंसियां नेफेड (एनएएफईडी) और एनसीसीएफ राज्यों की प्रतीक्षा किए बिना सीधे मंडियों में खरीद शुरू कर सकेंगी। इसके बाद राज्य एजेंसियां भी खरीद प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगी। इसका उद्देश्य किसानों को कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी से बचाना है।
राज्यों को 7,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) और कृषोन्नति योजना के तहत राज्यों को समय पर धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। पहले जारी 4,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त हाल ही में 3,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की गई है। इस तरह राज्यों को अब तक 7,000 करोड़ रुपए से अधिक हस्तांतरित किए जा चुके हैं। इससे कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
एग्रीस्टैक और फार्मर आईडी से किसानों को मिलेगी डिजिटल सुविधा
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। एग्रीस्टैक के माध्यम से किसानों की विशिष्ट फार्मर आईडी तैयार की जा रही हैं। इससे सरकारी योजनाओं और कृषि संबंधी तकनीकी सलाह को सीधे किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल कृषि व्यवस्था किसानों को योजनाओं से जोड़ने और सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्राकृतिक खेती और एफटीए से वैश्विक बाजार तक पहुंच
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के संकल्प के अनुरूप इस दिशा में काम किया जा रहा है। विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत भारतीय कृषि उत्पादों के लिए उपलब्ध वैश्विक बाजार के अवसरों की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाओं से जोड़ने के लिए राज्यों के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं।
गन्ने और कपास की फसलों को रोगों से बचाने की तैयारी
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि गन्ने में रेड रॉट और कपास में पिंक बॉलवर्म की समस्या से निपटने के लिए आईसीएआर के वैज्ञानिक रोग-प्रतिरोधी किस्में विकसित करने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फसल रोगों और कीटों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और उन्नत किस्मों के विकास पर जोर दिया जा रहा है।
खाद्य तेलों के आयात शुल्क पर संतुलित नीति
खाद्य तेलों, विशेषकर सूरजमुखी तेल के आयात शुल्क के संबंध में कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लेना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आयात शुल्क से जुड़े फैसलों में बाजार की स्थिरता और किसानों को होने वाले संभावित नुकसान, दोनों का ध्यान रखा जाता है।
पराली प्रदूषण में किसानों की हिस्सेदारी घटी: शिवराज सिंह चौहान
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और पराली जलाने के मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को प्रदूषण के लिए एकतरफा जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2019-20 में प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी लगभग 7% थी, जो अब घटकर करीब 2.5% रह गई है। उन्होंने कहा कि किसानों में जागरूकता बढ़ी है और वे स्वयं भी पराली जलाना नहीं चाहते।
किसानों को प्रताड़ित करने के बजाय सहयोग पर जोर
कृषि मंत्री ने खेतों को रेड जोन में शामिल करने और पराली जलाने के मामलों में सख्त कार्रवाई किए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को दोषी ठहराना और उन्हें खलनायक के रूप में पेश करना गलत है। पराली जलने से प्रदूषण में योगदान हो सकता है, लेकिन इसके आधार पर किसानों को प्रताड़ित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान किसानों से संवाद, उन्हें आवश्यक संसाधन और आधुनिक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने से निकलेगा। कृषि मंत्रालय किसानों के सम्मान और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
