जब एक नन्ही छात्रा ने ली मुख्यमंत्री का ‘इंटरव्यू …
रायगढ़ जिला परिषद की ‘पीएमश्री स्कूल वहाळ’ का वह कक्षा-कक्ष सामान्य दिनों की तरह ही था, लेकिन उस दिन वहां का माहौल कुछ अलग ही था। उत्साह, ऊर्जा और जिज्ञासा से भरे उस वातावरण में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इसी भीड़ में चौथी कक्षा में पढ़ने वाली एक छोटी-सी, लेकिन बेहद प्रतिभाशाली छात्रा खड़ी थी—उसका नाम था यशश्री मिठू घुले।
यशश्री के चेहरे पर घबराहट का कोई निशान नहीं था। उसकी आंखों में आत्मविश्वास की चमक साफ दिखाई दे रही थी। अपनी शिक्षिका साधना पाटील के मार्गदर्शन और स्वयं के आत्मविश्वास के बल पर वह सीधे मुख्यमंत्री के सामने पहुंची और उनका स्वागत करते हुए उनकी “मुलाकात” नहीं, बल्कि “मुलाखत” यानी इंटरव्यू लेना शुरू कर दिया।
एक जिला परिषद स्कूल की छोटी-सी छात्रा द्वारा मुख्यमंत्री से सीधे सवाल पूछना वहां मौजूद सभी लोगों के लिए आश्चर्यजनक और प्रेरणादायक अनुभव था।
यशश्री ने अपनी फाइल खोली और पहला सवाल बड़े सहज अंदाज में पूछा,
“सर, आपका नाम क्या है?”
इस मासूम लेकिन स्पष्ट सवाल पर मुख्यमंत्री मुस्कुरा उठे। उन्होंने भी उसी आत्मीयता से जवाब दिया,
“मेरा नाम देवेंद्र सरिता गंगाधरराव फडणवीस है।”
इसके बाद यशश्री ने उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन से जुड़े सवाल पूछने शुरू किए। उसने पूछा,
“सर, आपके इस सफर की शुरुआत कैसे हुई?”
मुख्यमंत्री ने सरल शब्दों में बताया कि उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत एक सामान्य छात्र आंदोलन से हुई थी। विद्यार्थी परिषद में काम करते हुए और छात्रों की समस्याओं को हल करते हुए उनका सफर धीरे-धीरे यहां तक पहुंचा।
संवाद आगे बढ़ा तो यशश्री ने एक और परिपक्व सवाल पूछा,
“सर, आपके सामाजिक कार्यों में सबसे बड़ी चुनौतियां कौन-सी थीं और आपने उनका सामना कैसे किया?”
इस पर मुख्यमंत्री ने उसे मित्रवत अंदाज में समझाया कि जब समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जाता है, तब पुरानी व्यवस्थाओं को बदलना पड़ता है और उसी दौरान अनेक कठिनाइयां सामने आती हैं।
उन्होंने कहा,
“ऐसे समय में हमारे सामने छत्रपति शिवाजी महाराज और भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जैसे महान आदर्श होते हैं। शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना के लिए संघर्ष किया और बाबासाहेब ने संविधान के माध्यम से समानता और अधिकारों का मार्ग दिखाया। इसलिए कितनी भी चुनौतियां आएं, यदि हम ईमानदारी से अच्छा काम करते रहें तो सफलता अवश्य मिलती है।”
मुख्यमंत्री के विचार सुनकर वहां मौजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक और अभिभावक गौरवान्वित महसूस कर रहे थे।
इंटरव्यू का सबसे दिलचस्प पल आखिर में आया। यशश्री ने पूछा,
“सर, आपके जीवन का ऐसा कौन-सा अनुभव है जो आज भी आपको प्रेरित करता है?”
मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“मेरे जीवन में कई बड़े अनुभव हैं, लेकिन आज तुम्हारे द्वारा लिया गया यह इंटरव्यू मुझे हमेशा याद रहेगा और प्रेरित करता रहेगा।”
मुख्यमंत्री का यह जवाब सुनते ही पूरा कक्षा-कक्ष तालियों और ठहाकों से गूंज उठा।
अंत में यशश्री ने मुख्यमंत्री को समय देने के लिए धन्यवाद दिया और मुख्यमंत्री ने भी उसकी पीठ थपथपाकर उसका उत्साह बढ़ाया। उस पल ऐसा लगा मानो मुख्यमंत्री भी इस नन्ही और होनहार छात्रा यशश्री के प्रशंसक बन गए हों।
एक शिक्षिका के समर्पित प्रयास, जिला परिषद स्कूल की छात्रा का आत्मविश्वास और बच्चों को मिले अवसर ने यह साबित कर दिया कि विद्यालय की डिजिटल लैब और प्रवेशोत्सव जैसे उपक्रम वास्तव में सार्थक हैं। यह घटना केवल एक इंटरव्यू नहीं थी, बल्कि ग्रामीण शिक्षा, आत्मविश्वास और नई पीढ़ी की क्षमता का प्रेरणादायी उदाहरण बन गई।
