गिरिराज सिंह ने IIHT सूत्र 2026 का किया उद्घाटन, हथकरघा शिक्षा को उद्योग और अनुसंधान से जोड़ने पर जोर
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने नई दिल्ली में भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIHTs) के प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन ‘IIHT सूत्र 2026’ का उद्घाटन किया। डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित सम्मेलन में हथकरघा शिक्षा को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, नवोन्मेष और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया गया। इस दौरान उद्योग, अनुसंधान और शैक्षणिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
हथकरघा शिक्षा के भविष्य पर राष्ट्रीय मंच
कपड़ा विकास आयुक्त (हैंडलूम), वस्त्र मंत्रालय के कार्यालय की ओर से आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, अनुसंधान संस्थानों, प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। ‘भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान : भारतीय हैंडलूम क्षेत्र का भविष्य बुनना—शिक्षित करें, नवोन्मेष करें, रूपांतरित करें’ विषय पर आयोजित सम्मेलन का उद्देश्य IIHTs को तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, नवोन्मेष, उद्यमिता और उद्योग सहयोग के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करना है।
हथकरघा क्षेत्र में तकनीकी बदलाव जरूरी
उद्घाटन सत्र में वस्त्र सचिव नीलम शमी राव, हथकरघा विकास आयुक्त डॉ. बीना एम. तथा सरकार, उद्योग, शैक्षणिक जगत और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र देश की सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति होने के साथ आजीविका, महिला सशक्तिकरण, निर्यात और सतत आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने कहा कि भारतीय हथकरघा परंपराओं के संरक्षण के साथ तकनीकी प्रगति, नवोन्मेष, उद्यमिता और अनुसंधान को आगे बढ़ाना जरूरी है। IIHTs को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, डिजाइन में नवोन्मेष, तकनीकी उन्नयन और क्षेत्र की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
सात दशकों में तैयार किए कुशल पेशेवर
गिरिराज सिंह ने बताया कि छह केंद्रीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों और पांच राज्य हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों ने पिछले सात दशकों में कई पीढ़ियों के कुशल पेशेवर तैयार किए हैं। ये पूर्व छात्र आज उद्योग, उद्यमिता, निर्यात, अनुसंधान और सार्वजनिक संस्थानों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने हाल के वर्षों में बीटेक कार्यक्रमों के विस्तार, अनुसंधान पहलों को मजबूत करने, प्रयोगशालाओं और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, छात्र सहायता उपायों और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।
आधुनिक जरूरतों के अनुरूप हो पाठ्यक्रम
वस्त्र सचिव नीलम शमी राव ने कहा कि हथकरघा शिक्षा को लगातार आधुनिक बनाना आवश्यक है। पाठ्यक्रमों को उभरती तकनीकों के अनुरूप तैयार करने, उद्योग साझेदारी मजबूत करने, अनुप्रयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने और नवोन्मेष आधारित अध्ययन को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि IIHTs को ऐसे संस्थानों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जो केवल रोजगार के लिए स्नातक तैयार न करें, बल्कि वस्त्र और हथकरघा क्षेत्रों में उद्यमिता, नेतृत्व और अनुसंधान के लिए भी सक्षम बनाएं।
IIHT सूत्र को दीर्घकालिक संस्थागत पहल का स्वरूप
हथकरघा विकास आयुक्त डॉ. बीना एम. ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि IIHT सूत्र वस्त्र मंत्रालय की दीर्घकालिक संस्थागत पहल है। इसका उद्देश्य भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों के लिए एक सहयोगी राष्ट्रीय मंच तैयार करना है। उन्होंने कहा कि यह पहल सरकार, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संस्थानों और पूर्व छात्रों के बीच भागीदारी को मजबूत करेगी। इससे IIHTs को नवोन्मेष, स्थिरता, उद्यमिता और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देने वाले भविष्य-तैयार संस्थानों के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में तीन रणनीतिक समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। ग्रासिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड के साथ समझौता पाठ्यक्रम को समृद्ध करने, इंटर्नशिप, उद्योग अनुभव, कौशल विकास और सहयोगी पहलों पर केंद्रित है। नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन के साथ समझौते के तहत सहयोगी अनुसंधान, परीक्षण, नवोन्मेष, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं भारतीय प्रबंधन संस्थान संभलपुर के साथ शैक्षणिक और प्रबंधन क्षेत्र में साझेदारी के जरिए नेतृत्व विकास, उद्यमिता, नवोन्मेष, संकाय विकास और संस्थागत क्षमता निर्माण पर काम किया जाएगा।
उद्योग और संस्थानों के बीच बढ़ेगा सहयोग
इन साझेदारियों से IIHTs और प्रमुख उद्योग, अनुसंधान तथा प्रबंधन शिक्षा संस्थानों के बीच संवाद और समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है। इससे हथकरघा क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और प्रासंगिकता बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के बदलते अवसरों के अनुरूप कौशल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए
कार्यक्रम के दौरान भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों के मेधावी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए स्वर्ण पदक और रैंक प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। मंत्रालय ने ‘हैंडलूम परिवर्तनकर्ता’ नामक प्रकाशन भी जारी किया। इसमें उन प्रतिष्ठित IIHT पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने उद्योग, उद्यमिता, निर्यात, अनुसंधान और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
‘भारत का हैंडलूम भविष्य बुनना’ फिल्म जारी
केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने IIHTs पर मंत्रालय की फिल्म ‘भारत का हैंडलूम भविष्य बुनना’ भी जारी की। फिल्म में भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों की यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की दृष्टि को दर्शाया गया है। इसमें कुशल पेशेवरों के विकास और भारत के हथकरघा क्षेत्र के रूपांतरण में IIHTs के योगदान को रेखांकित किया गया है।
विद्यार्थियों और शोध पहलों का प्रदर्शन
सम्मेलन में छात्र नवोन्मेष, संस्थागत उपलब्धियों, प्रत्यक्ष प्रदर्शनों, अनुसंधान पहलों और IIHTs में अपनाई जा रही उभरती तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों को विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और पूर्व छात्रों से संवाद करने तथा संस्थानों की तकनीकी और शैक्षणिक क्षमताओं को समझने का अवसर मिला।
उद्योग-अकादमी सहयोग पर हुआ मंथन
दोपहर बाद आयोजित तकनीकी सत्र में ‘उद्योग-अकादमी सहयोग के माध्यम से हैंडलूम शिक्षा को मजबूत करना : पाठ्यक्रम, कौशल और भविष्य-तैयारी’ विषय पर पैनल चर्चा हुई। इसमें उद्योग, शैक्षणिक जगत, अनुसंधान संस्थानों और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पैनल में पाठ्यक्रम सुधार, उद्योग भागीदारी, अनुप्रयुक्त अनुसंधान, उद्यमिता, उभरती तकनीक, कौशल विकास और संस्थागत सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई। बदलते वस्त्र और हथकरघा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप अगली पीढ़ी के पेशेवर तैयार करने के लिए इन क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया गया।
भविष्य-तैयार पेशेवर तैयार करने की दिशा में कदम
IIHT सूत्र 2026 को भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों को रणनीतिक साझेदारियों, नवोन्मेष, अनुसंधान और शैक्षणिक उत्कृष्टता के माध्यम से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसका उद्देश्य बदलते भारतीय हथकरघा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप कुशल और भविष्य-तैयार पेशेवर तैयार करना तथा तकनीकी शिक्षा को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना है।


