एमआईडीसी में गुंडागर्दी से परेशान कंपनी मालिक, प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार



नवी मुंबई । तुर्भे एमआईडीसी में अदालत के आदेश के अवहेलना करते हुए बिजली ,पानी कनेक्शन कट करने के साथ ही गेट पर बड़े बड़े खड़े किए जाने का मामला सामने आया है। इस तरह लगातार परेशान किए जाने के बाद अब प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
तुर्भे एमआईडीसी में अमर यूनिवर्सल प्रा. लि. की जगह को लेकर विवाद अब अदालत के आदेश और कथित दबाव की कार्रवाई तक पहुंच गया है। किराएदार कंपनी सैप्रिचुअल मल्टी वेंचर्स का आरोप है कि पांच वर्ष के लिए किराए पर ली गई जगह को महज एक साल में खाली करने का नोटिस दिया गया। अदालत से स्थगिती आदेश मिलने के बावजूद कथित तौर पर बिजली काट दी गई, ट्रांसफार्मर हटाया गया, पानी रोका गया और गेट के सामने खुदाई कर आवाजाही को बंद कर दी गई।
कंपनी संचालक संजय वर्मा का आरोप है कि कुछ लोगों के जरिए कंपनी खाली कराने के लिए धमकाया और दबाव बनाया जा रहा है। इस मामले की लिखित शिकायत पुलिस आयुक्त और स्थानीय पुलिस थाने में करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का भी उन्होंने आरोप लगाया है। वर्मा के मुताबिक शुरुआत में 10 वर्ष के रजिस्टर्ड एग्रीमेंट की बात हुई थी, लेकिन बाद में पांच वर्ष का करार कर आगे बढ़ाने का भरोसा दिया गया। इसी आधार पर कंपनी ने करीब 56 लाख रुपए एमआईडीसी को सब-लेटिंग चार्ज का भुगतान कर दिया उसके बाद बैंक से करीब 24 करोड़ रुपए का कर्ज लेकर कारोबार शुरू किया। लेकिन आज स्थिती यह है कि अमर यूनिवर्सल कंपनी की मनमानी के चलते यहां काम करने वाले कर्मचारी अब भूखमरी की कगार पर हैं?कंपनी का दावा है कि उसके 500 से अधिक ग्राहक हैं, जिनमें ब्रिटानिया, गोदरेज और बारामती एग्रो जैसी नामचीन कंपनियां शामिल हैं। गेट पर खुदाई से माल की आवाजाही ठप हो गई है, जिससे उन कंपनियों को मॉल की आपूर्ति नही हो पा रही है! इसलिए कंपनी पर 5 करोड़ से अधिक की देनदारी डूबने और ग्राहकों द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने का खतरा मंडरा रहा है।वर्मा ने सवाल उठाया कि जब अदालत का स्थगिती आदेश मौजूद है, तो बिजली-पानी बंद करने और रास्ता रोकने की कार्रवाई किसके इशारे पर हो रही है? मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कंपनी की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विवाद से जुड़े और भी गंभीर खुलासे किए जाने की बात कही गई है।
