आस्था, विश्वास और श्रद्धा का संगम बना है मऊरानीपुर के समीप कुरैचा रोड स्थित खधियां चौक के पास का लगभग 200 वर्ष पुराना मां काली का मंदिर
टीकमगढ़
रिपोर्ट – मनोज खरे
एंकर:
आस्था, विश्वास और श्रद्धा का संगम बना है मऊरानीपुर के समीप कुरैचा रोड स्थित खधियां चौक के पास का लगभग 200 वर्ष पुराना मां काली का मंदिर। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मां के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी समस्याओं के समाधान और मां के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
वीओ-1:
मऊरानीपुर से कुछ ही दूरी पर स्थित यह प्राचीन मां काली मंदिर आज क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। कोई स्वास्थ्य लाभ की कामना लेकर आता है, तो कोई परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए मां के चरणों में शीश नवाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां काली की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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मुख्य पुजारी पंडित संत सत्यानंद शुक्ला
वीओ-2:
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित संत सत्यानंद शुक्ला ने बताया कि यह मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है। उनके अनुसार, पहले यहां केवल एक छोटी-सी मढ़िया और चबूतरा था। एक दिन मां काली ने उन्हें स्वप्न में मंदिर निर्माण का आदेश दिया। इसके बाद उन्होंने मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया। शुरुआती दौर में स्थानीय स्तर पर विरोध भी हुआ, लेकिन मां की प्रेरणा और अटूट विश्वास के साथ उन्होंने निर्माण कार्य पूरा कराया। आज यही मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
एंकर आउट्रो:
श्रद्धा और विश्वास का यह पावन धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि लोगों के लिए उम्मीद और सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक बना हुआ है। यही कारण है कि हर दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां काली के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं।
