कैबिनेट ने एयरलाइंस के लिए 10,000 करोड़ रुपए के एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण कोष को दी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय अनुसूचित एयरलाइंस को विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में अस्थिरता से राहत देने के लिए 10,000 करोड़ रुपए तक के मूल्य स्थिरीकरण कोष को मंजूरी दी है। यह एकमुश्त बजटीय सहायता तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को ब्याज-मुक्त अग्रिम के रूप में दी जाएगी, ताकि पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ी ईंधन कीमतों के बीच एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
ओएमसी को मिलेगी ब्याज-मुक्त सहायता
कैबिनेट के फैसले के तहत पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के माध्यम से ओएमसी को 10,000 करोड़ रुपए तक की ब्याज-मुक्त अग्रिम सहायता दी जाएगी। यह राशि उन स्थितियों में ओएमसी के नुकसान की भरपाई करेगी, जब अंतरराष्ट्रीय एटीएफ कीमतें निर्धारित बेंचमार्क मूल्य से अधिक हो जाएंगी।
कीमतें सामान्य होने पर राशि की होगी वसूली
सरकार ने सहायता राशि की वसूली के लिए पुनर्प्राप्ति और ट्रू-अप तंत्र भी मंजूर किया है। अंतरराष्ट्रीय एटीएफ कीमतों के सामान्य होने पर ओएमसी से अंतर राशि वसूलकर भारत की संचित निधि में वापस जमा की जाएगी। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक पूरी सहायता राशि की वसूली नहीं हो जाती।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को मिलेगा लाभ
यह योजना घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के परिचालनों के लिए सभी इच्छुक भारतीय अनुसूचित एयरलाइंस पर लागू होगी। इससे एयरलाइंस को ईंधन लागत का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिलेगी और ईंधन कीमतों में अचानक वृद्धि के जोखिम को कम किया जा सकेगा।
ओएमसी से ही खरीदना होगा एटीएफ
योजना के तहत भाग लेने वाली एयरलाइंस और ओएमसी के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) होगा, जिस पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के हस्ताक्षर होंगे। इस व्यवस्था के तहत एयरलाइंस अधिकतम तीन वर्षों तक केवल ओएमसी से ही एटीएफ खरीदेंगी। इसकी वार्षिक समीक्षा की जाएगी या अग्रिम राशि की पूर्ण वसूली होने तक यह व्यवस्था लागू रहेगी।
निगरानी के लिए बनेगी समिति
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और व्यय विभाग के अधिकारियों की एक निगरानी समिति गठित की जाएगी। यह समिति दावों के सत्यापन, मिलान, निपटान और वसूली प्रक्रिया की निगरानी करेगी। सभी दावों और भुगतानों का लेखापरीक्षण भी कराया जाएगा।
36 महीने तक लागू रहेगी योजना
एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण सहायता 36 महीने तक प्रभावी रहेगी। आवश्यकता पड़ने पर और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद इसकी अवधि बढ़ाई भी जा सकेगी, यदि निर्धारित समय में पूरी राशि का निपटान नहीं हो पाता है।
एयरलाइंस और यात्रियों दोनों को मिलेगा फायदा
सरकार का मानना है कि इस तंत्र से एयरलाइंस को बेहतर वित्तीय और परिचालन योजना बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यात्रियों पर ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम होगा और हवाई किराए में अत्यधिक अस्थिरता को रोका जा सकेगा। यह कदम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क को बनाए रखने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार, निर्यात, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा देगा।
पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा दबाव
सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय एटीएफ कीमतों में भारी उछाल आया है। मार्च 2026 में एटीएफ की कीमत 60.50 रुपए प्रति लीटर थी, जो मई 2026 में बढ़कर 142 रुपए प्रति लीटर हो गई। एटीएफ किसी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत का लगभग 40% हिस्सा होता है और असाधारण परिस्थितियों में यह 60% तक पहुंच सकता है। इसके अलावा पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने से भारतीय एयरलाइंस की लंबी दूरी की उड़ानों में ईंधन खपत और परिचालन लागत भी बढ़ी है।
हवाई संपर्क बनाए रखने पर जोर
सरकार का कहना है कि यह कदम दूरस्थ, क्षेत्रीय, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों के लिए हवाई संपर्क बनाए रखने में मदद करेगा। साथ ही उड़ान योजना के तहत विकसित हवाई अड्डों सहित देशभर के विमानन बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और वैश्विक बाजारों के साथ भारत के जुड़ाव को मजबूती मिलेगी।
