पूरे राज्य में सनसनी फैलाने वाले नासिक स्थित प्रतिष्ठित टीसीएस कंपनी से जुड़े महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न,
प्रताड़ना और जबरन धर्मांतरण मामले की मुख्य संदिग्ध तथा गर्भवती आरोपी निदा खान की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। नासिक रोड स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में इस मामले पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और अब अदालत 12 जून को अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
इस चौंकाने वाले मामले से आईटी क्षेत्र में भारी हलचल मच गई थी। मामले से जुड़े सभी अपराधों में पुलिस अब आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर चुकी है।
नासिक स्थित टीसीएस की एक महिला कर्मचारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी में कार्यरत कुछ युवतियों और महिलाओं को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था, उनका यौन उत्पीड़न किया जाता था तथा उनका ब्रेनवॉश कर उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला जाता था। इस शिकायत के बाद यह मामला सामने आया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई नाका और देवळाली कैंप पुलिस थानों में विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए। प्रकरण का दायरा बड़ा होने के कारण कई अपराध दर्ज किए गए हैं और जांच के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
मामला दर्ज होने के बाद से इस प्रकरण की मुख्य संदिग्ध निदा खान पुलिस को लगातार चकमा दे रही थी। वह लगभग 40 दिनों तक फरार रही। इस दौरान उसने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने 2 मई को उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद नासिक और छत्रपति संभाजीनगर पुलिस ने संयुक्त रूप से जाल बिछाकर बेहद गोपनीय तरीके से कार्रवाई की। आखिरकार छत्रपति संभाजीनगर के एक फ्लैट से निदा खान को गिरफ्तार कर लिया गया। वर्तमान में निदा खान नासिक केंद्रीय कारागार में बंद है।
उसने नियमित जमानत के लिए नासिक रोड स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में आवेदन किया था। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब 12 जून को अदालत का निर्णय आएगा। निदा खान को जमानत मिलेगी या फिर उसकी जेल में रहने की अवधि बढ़ेगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
नासिक से संदीप द्विवेदी की रिपोर्ट
