सीबीजी ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्रोजेक्ट को लेकर तुर्भे की जनता हुई आक्रामक, मनपा आयुक्त से मुलाकात कर रखीं मांगें

सीबीजी ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्रोजेक्ट को लेकर तुर्भे की जनता हुई आक्रामक, मनपा आयुक्त से मुलाकात कर रखीं मांगें

cennews
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सीबीजी ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्रोजेक्ट को लेकर तुर्भे की जनता हुई आक्रामक,

सीबीजी ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्रोजेक्ट को लेकर तुर्भे की जनता हुई आक्रामक, मनपा आयुक्त से मुलाकात कर रखीं मांगें

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नवी मुंबई : नवी मुंबई महानगरपालिका द्वारा तुर्भे स्थित स्टोअर डम्पिंग ग्राउंड पर प्रस्तावित सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) एवं ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में विरोध बढ़ता दिखाई दे रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट को स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना लागू किया जा रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को तुर्भे क्षेत्र के शिवसेना नगरसेवक एवं पूर्व स्थायी समिति सभापति सुरेश शिवाजी कुलकर्णी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मनपा आयुक्त डॉ. कैलाश शिंदे से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। इस दौरान नगरसेविका अबोली कुलकर्णी, सविता सांगले, सविता लगाडे, पूर्व नगरसेविका संगीता वास्के, डॉ. रामचंद्र सांगले, एड. गुरु सूर्यवंशी, देवीदास लगाडे, अनिल पाटिल, दीपेश शिंदे, सुभाष गुप्ता, के. आर. बाघमारे सहित कई स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।
प्रतिनिधिमंडल ने लिखित पत्र देकर प्रोजेक्ट का विरोध दर्ज कराया और कहा कि स्थानीय लोगों को अंधेरे में रखकर यह योजना लाई जा रही है। नागरिकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी शंकाओं का समाधान नहीं किया गया तो इसके खिलाफ जनआंदोलन किया जाएगा।
इस पर मनपा आयुक्त डॉ. कैलाश शिंदे ने स्पष्ट किया कि यह प्रोजेक्ट नागरिकों के लिए लाभदायक साबित होगा और इससे प्रदूषण शून्य रखने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों के मन में जो भी भ्रम और शंकाएं हैं, उन्हें दूर किया जाएगा तथा प्रोजेक्ट को नियमानुसार आगे बढ़ाया जाएगा।
इस बीच महाराष्ट्र सरकार के माध्यम से नवी मुंबई में झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना (एसआरए) के तहत पुनर्विकास प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सर्वेक्षण कार्य भी जारी है। हालांकि, प्रस्तावित सीबीजी एवं ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्रोजेक्ट के कारण इस योजना पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग 500 मीटर का ‘बफर जोन’ आवश्यक होता है, जिसके भीतर आवासीय निर्माण की अनुमति में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही प्रोजेक्ट से निकलने वाले धुएं और राख से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के तहत भी ऐसे प्रोजेक्ट्स के आसपास निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
यदि झोपड़पट्टी क्षेत्र इस बफर जोन के दायरे में आता है, तो एसआरए के तहत बनने वाली इमारतों को तकनीकी मंजूरी मिलने में कठिनाइयां हो सकती हैं। इससे स्थानीय निवासियों का पुनर्वसन प्रभावित होने या उन्हें अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की स्थिति बन सकती है।
इसी संदर्भ में नागरिकों के मन में भ्रम की स्थिति न बने और पर्यावरणीय प्रभावों का उचित आकलन हो सके, इसके लिए मनपा आयुक्त के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयुक्त डॉ. कैलाश शिंदे ने कहा कि यह प्रोजेक्ट शहर और नागरिकों के हित में होगा तथा लोगों की सभी शंकाओं का समाधान कर परियोजना को पूरा किया जाएगा।

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