शिक्षा से स्वास्थ्य तक, एनसीएल की सीएसआर पहलें बन रहीं विकास की मजबूत आधारशिला

सिंगरौली स्थित भारत सरकार की अनुषंगी कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) अपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) पहलों के माध्यम से सिंगरौली, सोनभद्र और आसपास के क्षेत्रों में सतत एवं समावेशी विकास को निरंतर बढ़ावा दे रही है। विशेष रूप से पिछले 12 वर्षों में कंपनी ने सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वर्ष 2013-14 में एनसीएल का सीएसआर व्यय 39 करोड़ रुपए था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 146 करोड़ रुपए हो गया है। इस अवधि में कंपनी ने सिंगरौली परिक्षेत्र में सतत सामाजिक विकास पर 1,370 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जिससे विभिन्न जनकल्याणकारी पहलों के जरिए लगभग 10 लाख लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर विशेष फोकस
कोयला मंत्रालय के निर्देशन में संचालित एनसीएल की सीएसआर पहलें शिक्षा, स्वास्थ्य, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास, स्वच्छ पेयजल, आधारभूत संरचना निर्माण और ग्रामीण आजीविका जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। इन पहलों ने सिंगरौली, सोनभद्र और आसपास के क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं पैदा की हैं।
खनन शिक्षा को मिलेगा नया आयाम
एनसीएल अपनी सीएसआर पहल के तहत सिंगरौली में लगभग 76 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित किए जा रहे इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग टेक्नोलॉजी को वित्तीय सहयोग दे रही है। यह संस्थान क्षेत्र की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप माइनिंग इंजीनियरिंग की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएगा। संस्थान का संचालन तकनीकी शिक्षा संचालनालय, भोपाल द्वारा किया जाएगा।
दिव्यांगजनों के पुनर्वास का सशक्त केंद्र
एनसीएल द्वारा संचालित जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र सिंगरौली (मध्य प्रदेश), सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) और सूरजपुर (छत्तीसगढ़) के दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस पहल के तहत प्रतिवर्ष करीब 2,000 दिव्यांगजन स्पीच थेरेपी, फिजियोथेरेपी, परामर्श, कृत्रिम उपकरण और अन्य पुनर्वास सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
‘चरक’ योजना बनी गंभीर मरीजों का सहारा
एनसीएल की ‘चरक – कम्युनिटी हेल्थ: ए रिस्पॉन्सिव एक्शन फॉर कोयलांचल’ योजना के माध्यम से कैंसर, टीबी, एचआईवी, हृदय रोग और किडनी प्रत्यारोपण जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 8.50 करोड़ रुपए के प्रावधान वाली इस परियोजना के तहत 13 मरीजों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।
वाराणसी में आधुनिक वृद्धाश्रम का निर्माण
एनसीएल ने वाराणसी में 24.76 करोड़ रुपए की लागत से 100 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक वृद्धाश्रम का निर्माण कराया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यह सुविधा आश्रयहीन वृद्धजनों को सुरक्षित, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण आवास तथा देखभाल उपलब्ध करा रही है।
हरित सीएसआर से पर्यावरण संरक्षण
कंपनी ने गोपद और मयार नदियों के कैचमेंट क्षेत्रों की सफाई, चेक डैम और परकोलेशन डैम निर्माण जैसी गतिविधियों पर 9.53 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इस पहल से जल संरक्षण, भूजल स्तर सुधार, जल उपलब्धता बढ़ाने और मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद मिली है।
कौशल विकास से रोजगार के अवसर
एनसीएल ने सिंगरौली के आईटीआई वैढ़न और सोनभद्र के आईटीआई दुद्धी के विकास पर 3.86 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। विभिन्न तकनीकी ट्रेडों में प्रशिक्षण के माध्यम से 1,350 से अधिक युवाओं, महिलाओं और परियोजना प्रभावित परिवारों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया गया है।
आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
सोनभद्र स्थित सेवा कुंज आश्रम, चपकी में किए गए विकास कार्यों से लगभग 300 आदिवासी और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है। परियोजना के तहत ऑडिटोरियम, इंडोर स्पोर्ट्स और तीरंदाजी प्रशिक्षण जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती
एनसीएल ने होमी भाभा कैंसर अस्पताल और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र, वाराणसी सहित प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 14 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता प्रदान की है। इस पहल से अब तक लगभग 2,800 मरीज लाभान्वित हुए हैं।
‘नन्हा-सा-दिल-एनसीएल’ से बच्चों को नई जिंदगी
जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए संचालित ‘नन्हा-सा-दिल-एनसीएल’ परियोजना के तहत सिंगरौली, सोनभद्र और आसपास के क्षेत्रों में 38,000 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। अब तक 240 बच्चों की निःशुल्क हृदय शल्य चिकित्सा कराई जा चुकी है।
रीवा में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सेवाओं को मिला संबल
एनसीएल ने सीएसआर के तहत श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी यूनिट के विकास के लिए लगभग 6 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है।
पोल्ट्री परियोजना से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
‘स्मॉल होल्डर्स पोल्ट्री परियोजना’ आदिवासी परिवारों, विशेषकर महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना से अब तक 1,050 आदिवासी परिवार लाभान्वित हुए हैं, जबकि बैकवर्ड लिंकेज के माध्यम से निकट भविष्य में 1,500 अतिरिक्त परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है।
10 हजार से अधिक घरों तक पहुंची बिजली
एनसीएल ने चितरंगी ब्लॉक में सीएसआर के तहत 10,253 घरों का विद्युतीकरण कराया है। इस पहल से लगभग 40,000 लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को नई गति मिली है।
जनकल्याण और विकास के संकल्प पर कायम एनसीएल
एनसीएल की ये परियोजनाएं केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का मजबूत आधार बन रही हैं। खदानों से निकलने वाली ऊर्जा के जरिए देश को रोशन करने के साथ-साथ अपनी सामाजिक पहलों से जन-जन के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कंपनी का यह 12 वर्षों का सफर इस बात का प्रमाण है कि एनसीएल की प्राथमिकताओं में स्थानीय समुदाय का विश्वास, विकास और जनकल्याण हमेशा शामिल रहेगा।
