डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूएमएमआईडी कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित किया, जीनोमिक चिकित्सा पर दिया जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दुर्लभ आनुवंशिक विकारों और रोगों के लिए यूएमएमआईडी (वंशानुगत विकारों के इलाज की अनूठी विधियां) कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा कि चिकित्सा का भविष्य जीन और जीनोम आधारित व्यक्तिगत उपचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नई दिल्ली स्थित पृथ्वी भवन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यूएमएमआईडी भारत में सटीक चिकित्सा (प्रिसिजन मेडिसिन) के भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है और यह पहल स्वास्थ्य सेवा को अधिक किफायती, सुलभ और रोगी-केंद्रित बनाने में मदद करेगी।
दुर्लभ आनुवंशिक रोगों के लिए राष्ट्रीय पहल
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वंशानुगत और दुर्लभ आनुवंशिक विकार लंबे समय तक उपेक्षित रहे, क्योंकि इनका निदान कठिन और उपचार अत्यधिक महंगा था। उन्होंने कहा कि यूएमएमआईडी कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे परिवारों के लिए निदान और इलाज को व्यवहार्य, वहनीय और सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि यह पहल आनुवंशिक निदान, प्रसवपूर्व और नवजात शिशु स्क्रीनिंग, आनुवंशिक परामर्श, चिकित्सकों के प्रशिक्षण और सामुदायिक जागरूकता को एकीकृत जनस्वास्थ्य मॉडल के तहत जोड़ती है।
यूएमएमआईडी डैशबोर्ड और संकलन का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूएमएमआईडी संकलन का विमोचन किया और यूएमएमआईडी डैशबोर्ड की शुरुआत की। इसका उद्देश्य आनुवंशिक विकारों के निदान, परामर्श, जागरूकता अभियान और कार्यक्रम निगरानी को राष्ट्रव्यापी स्तर पर मजबूत करना है। इस अवसर पर डॉ. राजेश एस. गोखले, डॉ. सुचिता नीनावे सहित वरिष्ठ वैज्ञानिक, चिकित्सक और स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ मौजूद रहे।
तीन लाख से अधिक लोगों को मिला लाभ
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यूएमएमआईडी कार्यक्रम के तहत अब तक लगभग तीन लाख लोगों को स्क्रीनिंग और निदान सेवाओं का लाभ मिल चुका है। इसके तहत देशभर में करीब 30 उन्नत निदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिससे महानगरों से बाहर भी जीनोमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का विस्तार आकांक्षी जिलों और वंचित क्षेत्रों तक किया गया है।
जीन आधारित चिकित्सा की ओर बढ़ रहा भारत
जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य में मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार भी मरीजों की आनुवंशिक प्रोफाइल के आधार पर तय किया जा सकेगा। उन्होंने आनुवंशिक चिकित्सा और परमाणु चिकित्सा को स्वास्थ्य सेवा के उभरते महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि यूएमएमआईडी यह दर्शाता है कि विज्ञान, करुणा और सार्वजनिक नीति मिलकर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
वैज्ञानिक नवाचार और स्वास्थ्य समाधान को बढ़ावा
डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि भारत की आनुवंशिक विविधता वैज्ञानिक नवाचार और व्यावहारिक स्वास्थ्य समाधानों के लिए अपार अवसर प्रदान करती है। वहीं डॉ. सुचिता नीनावे ने कहा कि यूएमएमआईडी ने दुर्लभ और वंशानुगत रोगों के लिए देशव्यापी समन्वित नेटवर्क विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में यूएमएमआईडी की उपलब्धियों, सफलता की कहानियों और भविष्य की रूपरेखा पर प्रस्तुतियां भी दी गईं।
