कोपरखैरने में श्री कृपा सोसायटी के रिडेवलपमेंट पर रणकंदन!
सोसायटी कमेटी और सत्यम रियल्टी के खिलाफ रहवासियों का अनशन; कथित फर्जी हस्ताक्षरों की जांच की मांग
नवी मुंबई : कोपरखैरने सेक्टर-22 स्थित श्री कृपा हाउसिंग सोसायटी के रिडेवलपमेंट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोसायटी कमेटी और सत्यम रियल्टी के कथित मनमाने कामकाज के विरोध में रहवासियों ने श्रृंखलाबद्ध अनशन शुरू किया है। रहवासियों का स्पष्ट कहना है कि वे रिडेवलपमेंट के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया में कथित तौर पर पारदर्शिता का अभाव और मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।
‘रिडेवलपमेंट का विरोध नहीं, मनमानी का विरोध!’
अनशन कर रहे रहवासियों का आरोप है कि सोसायटी के सभी सदस्यों को उचित जानकारी दिए बिना और उन्हें विश्वास में लिए बगैर रिडेवलपमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इतना ही नहीं, कुछ दस्तावेजों पर रहवासियों के कथित फर्जी हस्ताक्षर किए जाने का गंभीर आरोप भी लगाया गया है। इस आरोप के सामने आने के बाद सोसायटी के रिडेवलपमेंट को लेकर विवाद और गहरा गया है।
रहवासियों का कहना है कि रिडेवलपमेंट जैसे महत्वपूर्ण फैसले में प्रत्येक सदस्य को पूरी जानकारी देना, नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करना और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। किसी भी सदस्य के अधिकारों को नजरअंदाज कर प्रक्रिया आगे बढ़ाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कथित फर्जी हस्ताक्षरों की निष्पक्ष जांच की मांग
रहवासियों ने संबंधित दस्तावेजों और उन पर किए गए हस्ताक्षरों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही रिडेवलपमेंट से संबंधित अब तक की पूरी प्रक्रिया सभी सदस्यों के सामने रखने और उनकी जानकारी एवं सहमति के बाद ही आगे की कार्रवाई करने की मांग की गई है।
“हमें रिडेवलपमेंट मंजूर है, लेकिन रहवासियों को अंधेरे में रखकर या कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर प्रक्रिया चलाने का हम विरोध करेंगे,” ऐसी ठोस भूमिका अनशनकारी रहवासियों ने रखी है।
अब उठ रहे हैं कई सवाल
आखिर रिडेवलपमेंट की प्रक्रिया किसकी सहमति से आगे बढ़ाई गई? संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले सदस्यों की वास्तविक सहमति ली गई थी या नहीं? और कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों की जांच कब होगी—इन सवालों को लेकर रहवासियों में नाराजगी है।
इस बीच, लगाए गए आरोपों पर श्री कृपा हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड कमेटी और सत्यम रियल्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। उनका पक्ष सामने आने के बाद मामले की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
