डिजिटल टोलिंग को नई गति, फास्टैग एनुअल पास ने पार किया 1 करोड़ उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा

केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि ‘फास्टैग एनुअल पास’ ने लॉन्च के बाद महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 1 करोड़ उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा पार कर लिया है। पिछले वर्ष 15 अगस्त को शुरू की गई यह सुविधा राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है और डिजिटल टोलिंग व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
करीब 1,150 टोल प्लाजा पर लागू है वार्षिक पास
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, फास्टैग एनुअल पास देशभर के करीब 1,150 टोल प्लाजा पर लागू है, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे शामिल हैं। इस सुविधा के तहत वाहन मालिकों को बार-बार फास्टैग रिचार्ज कराने की जरूरत नहीं पड़ती। 3,075 रुपए के एकमुश्त भुगतान के बाद पास एक वर्ष या 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध रहता है।
गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए उपलब्ध सुविधा
मंत्रालय ने बताया कि फास्टैग एनुअल पास उन सभी गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए उपलब्ध है, जिनमें वैध फास्टैग लगा हुआ है। वाहन मालिक राजमार्ग यात्रा ऐप के माध्यम से एकमुश्त शुल्क का भुगतान कर सकते हैं, जिसके बाद वार्षिक पास वाहन से जुड़े मौजूदा फास्टैग पर ही सक्रिय हो जाता है। इससे अलग से नया टैग लेने या बार-बार रिचार्ज कराने की जरूरत नहीं रहती।
बढ़ती स्वीकार्यता से डिजिटल टोलिंग को बढ़ावा
सरकार के अनुसार, फास्टैग एनुअल पास को मिल रही बढ़ती स्वीकृति बताती है कि यह सुविधा राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्बाध और किफायती यात्रा को बढ़ावा देने में मदद कर रही है। इससे टोल भुगतान प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हुई है और यात्रियों को टोल प्लाजा पर भुगतान के लिए लगने वाले समय में भी कमी आई है।
एनएचएआई ने शुरू की ‘वनटैग’ सुविधा
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पिछले महीने ‘वनटैग’ सुविधा भी शुरू की थी। यह फास्टैग पोर्टेबिलिटी सेवा है, जिसके जरिए उपयोगकर्ता अपने वाहन पर लगे मौजूदा फास्टैग को बदले बिना उसका जारीकर्ता बैंक बदल सकते हैं। इससे नया फिजिकल टैग लेने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और उपयोगकर्ताओं को फास्टैग से जुड़ी बैंकिंग सेवाओं में अधिक लचीलापन मिलता है।
देश में 98% से अधिक फास्टैग पहुंच
मंत्रालय के अनुसार, देश में फास्टैग की पहुंच अब 98% से अधिक हो चुकी है और इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या करीब 13 करोड़ तक पहुंच गई है। फास्टैग ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली को व्यापक रूप से बदलते हुए टोल प्लाजा पर भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में योगदान दिया है।
ऐप के जरिए बदला जा सकता है फास्टैग जारीकर्ता बैंक
वनटैग सुविधा के तहत फास्टैग उपयोगकर्ता राजमार्ग यात्रा ऐप में लॉग-इन करके अपने वाहन का पंजीकरण नंबर दर्ज कर पात्रता की जांच कर सकते हैं। इसके बाद मौजूदा जारीकर्ता बैंक की ओर से 6 अंकों का मोबाइल वेरिफिकेशन कोड (एमवीसी) भेजा जाता है। सत्यापन पूरा होने के बाद उपयोगकर्ता नया जारीकर्ता बैंक चुन सकता है और आवश्यक केवाईसी तथा वॉलेट ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर सकता है।
डिजिटल टोलिंग व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर
सरकार का कहना है कि फास्टैग एनुअल पास और वनटैग जैसी सुविधाएं देश की डिजिटल टोलिंग व्यवस्था को और मजबूत करेंगी। इन पहलों के जरिए हाईवे यात्रियों को अधिक सुविधा और लचीलापन देने के साथ टोल भुगतान को सरल बनाने तथा यात्रा अनुभव को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।
