मुंबई, चेंबूर: चेंबूर के प्रसिद्ध समाजसेवी रमेश लोहाणा के मार्गदर्शन में सिंधी समाज के प्रमुख धार्मिक पर्व 40 दिवसीय श्री झूलेलाल चालीसा महोत्सव का शुभारंभ श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया गया।
महोत्सव के प्रथम दिन चेंबूर कैंप स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना, आरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आशिष तालाब परिसर में भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ, जो 41 दिनों तक भक्तिमय वातावरण में निरंतर जारी रहेगा।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी चेंबूर के आशिष तालाब परिसर में श्री झूलेलाल चालीसा महोत्सव का शुभारंभ 16 जुलाई से हुआ है। यह महोत्सव 24 अगस्त तक चलेगा, जबकि 41वें दिन, 25 अगस्त 2026 को इसका समापन होगा।
जानकारी के अनुसार, यह चालीसा महोत्सव प्रतिवर्ष 16 जुलाई से प्रारंभ होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन सूर्यदेव कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे इस उत्सव के शुभारंभ का विशेष कारण माना जाता है।
चेंबूर क्षेत्र में सिंधी समाज की बड़ी आबादी निवास करती है। पिछले लगभग 50 वर्षों से सिंधी समाज इस महोत्सव को निरंतर श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाता आ रहा है। महोत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम को बड़ी संख्या में श्रद्धालु आशिष तालाब के तट पर स्थापित भगवान झूलेलाल एवं वरुण देव की प्रतिमा के समक्ष पूजा, आरती और भजन-कीर्तन में भाग लेते हैं तथा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
इस अवसर पर श्रद्धालु तालाब की मछलियों को श्रद्धापूर्वक खाद्य सामग्री अर्पित कर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
महोत्सव के संयोजक एवं समाजसेवी रमेश लोहाणा ने बताया कि इस धार्मिक परंपरा की शुरुआत उनके काका ने लगभग 50 वर्ष पहले की थी। तब से यह महोत्सव लगातार पूरे श्रद्धाभाव और सामाजिक एकता के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस महोत्सव में भाग लेकर भगवान झूलेलाल का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं।
