यूनेस्को की एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय सूची में शामिल हुईं राजतरंगिणी, महाभारत और अर्थशास्त्र की पांडुलिपियां
जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक पहचान, यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में मिली जगह
जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर और पूरे देश के लिए गौरव का विषय है कि भारत की तीन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं साहित्यिक कृतियों—कल्हण की राजतरंगिणी, महाभारत और अर्थशास्त्र—को यूनेस्को (UNESCO) के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय रजिस्टर में शामिल किया गया है।
इन कृतियों का इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रजिस्टर में शामिल होना भारत की समृद्ध सभ्यतागत, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपराओं की वैश्विक महत्ता को रेखांकित करता है। विशेष रूप से कश्मीर के महान इतिहासकार कल्हण द्वारा रचित राजतरंगिणी को मिली यह पहचान जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
राजतरंगिणी कश्मीर के इतिहास का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ है, जिसमें तत्कालीन शासकों, राजनीतिक घटनाओं, सामाजिक परिस्थितियों और क्षेत्र की ऐतिहासिक परंपराओं का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ कश्मीर की ऐतिहासिक पहचान और प्राचीन ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
वहीं, महाभारत भारतीय साहित्य, दर्शन और संस्कृति का प्रमुख महाकाव्य है, जबकि अर्थशास्त्र शासन व्यवस्था, अर्थनीति, प्रशासन और कूटनीति से संबंधित प्राचीन भारतीय ज्ञान का महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
इस उपलब्धि को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं के संरक्षण और वैश्विक स्तर पर उनके प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यूनेस्को की यह मान्यता एक बार फिर दर्शाती है कि भारत की सभ्यतागत विरासत और प्राचीन साहित्य का महत्व केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि इनका योगदान पूरी मानवता के लिए मूल्यवान है।
यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन अमूल्य ऐतिहासिक और साहित्यिक धरोहरों को संरक्षित करने तथा उनके ज्ञान को आगे बढ़ाने की सामूहिक जिम्मेदारी की भी याद दिलाती है।
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