भारत को वैश्विक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब बनाने के लिए हरित विकास और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी : भूपेंद्र यादव

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में आयोजित ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी: विकसित भारत के लिए भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब बनाना’ विषय पर एसोचैम के राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की। सम्मेलन में वरिष्ठ नीति निर्माता, उद्योगपति, वाहन निर्माता, प्रौद्योगिकी प्रदाता और अन्य हितधारकों ने भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने तथा देश को वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण केंद्र बनाने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
हरित विकास और सर्कुलर अर्थव्यवस्था पर दिया जोर
भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना केवल एक तकनीक से दूसरी तकनीक में बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक स्थायी औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इससे विनिर्माण को मजबूती मिलेगी, हरित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि ई-मोबिलिटी की ओर बदलाव में हरित विकास, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शी शासन और सर्कुलर अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया को बनाया गया सरल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संबंधी मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई सुधार किए हैं। परिवेश पोर्टल के माध्यम से अनुमोदन प्रणाली का डिजिटलीकरण किया गया है, अनुपालन आवश्यकताओं को तर्कसंगत बनाया गया है और पर्यावरण संरक्षण से समझौता किए बिना कारोबार सुगमता को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से जिम्मेदार विकास के साथ निवेश को भी गति मिली है।
रीसायकल और संसाधन दक्षता पर होगा भविष्य का विकास
भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत का भविष्य ‘लेना-बनाना-निपटाना’ मॉडल से आगे बढ़कर पुन: उपयोग, रीसायकल और सतत संसाधन प्रबंधन पर आधारित सर्कुलर अर्थव्यवस्था में है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थानीय विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला, बैटरी रीसायकल और संसाधन दक्षता का समर्थन मिलना चाहिए।
सहयोग से बनेगा नवाचार आधारित इकोसिस्टम
उन्होंने कहा कि उद्योग, नीति निर्माता और संस्थानों को मिलकर ऐसा नवाचार आधारित इकोसिस्टम तैयार करना होगा, जिससे भारत स्वच्छ परिवहन का वैश्विक केंद्र बन सके। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को साथ-साथ आगे बढ़ना होगा और सामूहिक प्रयासों से भारत सतत विनिर्माण, हरित परिवहन और जलवायु-अनुकूल विकास में वैश्विक अग्रणी बन सकता है।
नीतिगत निरंतरता और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर चर्चा
सम्मेलन में नीतिगत निरंतरता, मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण के स्थानीयकरण, बैटरी आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय सहायता और तकनीकी नवाचार जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारत को वैश्विक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब बनाने के लिए आवश्यक रोडमैप पर विचार साझा किए। कार्यक्रम में एसोचैम के अध्यक्ष और यूएनओ मिंडा के चेयरमैन निर्मल के. मिंडा, एसोचैम नेशनल काउंसिल ऑन ग्रीन मोबिलिटी के चेयरमैन तथा जेबीएम ग्रुप के वाइस सीएमडी निशांत आर्य और एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल सहित कई प्रमुख उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे
