# डैम में पानी, फिर भी नवी मुंबईकरों के हलक सूखे! 150 साल पुराने मोगली डैम पर रेलवे का कब्जा, जनता को कब मिलेगी राहत?
**दिघा के इलठण पाडा स्थित ब्रिटिशकालीन जलाशय के हस्तांतरण में देरी; ऐरोली, रबाले और घनसोली के नागरिकों को उम्मीद, लेकिन पानी का इस्तेमाल कब होगा?**
**नवी मुंबई:** एक तरफ पानी की किल्लत से जूझते परिवार, पानी के लिए परेशान होते नागरिक और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चिंता; दूसरी तरफ शहर के पास मौजूद एक ऐतिहासिक जलस्रोत, जिसका इस्तेमाल आज भी व्यापक जनहित में नहीं हो पा रहा है। यह तस्वीर है दिघा के इलठण पाडा परिसर में स्थित करीब 150 साल पुराने ब्रिटिशकालीन मोगली डैम की। सवाल सिर्फ एक डैम का नहीं, बल्कि उन हजारों नागरिकों की उम्मीदों का है, जिन्हें बेहतर जलापूर्ति की आस है।
बताया जाता है कि तत्कालीन ब्रिटिश अधिकारी हिल्टन ने इस स्थान की खोज की थी। ठाणे रेलवे स्टेशन के निर्माण के दौरान पानी की जरूरत पूरी करने के लिए पहाड़ी के बीच पत्थरों का बांध बनाकर इस जलाशय का निर्माण किया गया था। करीब 20 एकड़ में फैले इस डैम की क्षमता लगभग 40 से 50 लाख लीटर बताई जाती है, जबकि इसकी गहराई 40 फीट से अधिक है।
### पानी की चिंता में नागरिक, जलस्रोत के हस्तांतरण पर अटका मामला!
नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) की ओर से इस डैम को रेलवे प्रशासन से हस्तांतरित कराने की मांग की जा रही है। लेकिन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से इस जलस्रोत का स्थानीय जलापूर्ति के लिए उपयोग करने की योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
इसका सबसे बड़ा सवाल आम नागरिकों से जुड़ा है। जिन परिवारों को रोजाना पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता करनी पड़ती है, उनके लिए इस तरह के जलस्रोत का बेहतर उपयोग बड़ी राहत बन सकता है। ऐरोली, रबाले और घनसोली जैसे क्षेत्रों में जलापूर्ति की समस्या कम करने की दिशा में इस डैम की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, इसके लिए जल की उपलब्धता, गुणवत्ता, तकनीकी स्थिति और वास्तविक आपूर्ति क्षमता का आकलन जरूरी है।
### 150 साल पुराना डैम भी बदहाली का शिकार!
पर्याप्त रखरखाव और मरम्मत के अभाव में डैम की दीवारों से पानी रिसने की बात सामने आई है। ऐसे में केवल हस्तांतरण ही नहीं, बल्कि बांध की सुरक्षा, मरम्मत और जलसंग्रह क्षमता की तकनीकी जांच भी जरूरी है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो एक ऐतिहासिक जलस्रोत का उपयोग और संरक्षण दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
### नागरिकों का सवाल—पानी की समस्या का समाधान कब?
रेलवे प्रशासन और महानगरपालिका के बीच हस्तांतरण का मामला कब सुलझेगा? डैम की मरम्मत और पानी की गुणवत्ता की जांच कब होगी? और सबसे अहम, इस जलस्रोत से स्थानीय नागरिकों को राहत देने की ठोस योजना कब बनेगी?
**पानी केवल सुविधा नहीं, हर परिवार की बुनियादी जरूरत है।** यदि तकनीकी रूप से संभव हो, तो मोगली डैम का संरक्षण और नियोजित उपयोग नवी मुंबई के लिए एक अतिरिक्त जलस्रोत साबित हो सकता है। अब जरूरत है कि संबंधित प्रशासन आपसी समन्वय से इस मामले को आगे बढ़ाए, ताकि नागरिकों की उम्मीदें सिर्फ आश्वासनों तक सीमित न रहें।
