एक लाख की रिश्वत का खेल! एसीबी के जाल में मंडल अधिकारी
7/12 पर वारिसों का नाम चढ़ाने के लिए मांगे थे ₹1 लाख; महिला सहायिका के जरिए रकम लेने का आरोप, तलाठी भी हिरासत में
नवी मुंबई । उरन में जमीन के 7/12 उतारे पर वारिसों का नाम दर्ज करना भी अब कथित तौर पर बिना ‘रेट’ के संभव नहीं? उरण के चिरनेर में राजस्व विभाग से जुड़ा ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है। एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में मंडल अधिकारी को एसीबी ने रंगेहाथ पकड़ा है। रिश्वत की रकम सीधे लेने के बजाय निजी महिला सहायिका के जरिए लेने का कथित तरीका अपनाया गया। मामले में संबंधित तलाठी को भी एसीबी ने हिरासत में लिया है।
मामला चिरनेर की जमीन के 7/12 उतारे से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के मामा, मावशी, भाई और बहन के संयुक्त नाम वाली जमीन पर मृत बहन के वारिसों के नाम दर्ज करने और मृत भाई का नाम हटाने के लिए आवेदन किया गया था।लेकिन आरोप है कि इस सरकारी काम के बदले मंडल अधिकारी केशव दगडू मोहिते और तलाठी जय हिंद बिरशा कोली ने कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी।
पहले मांग की पुष्टि, फिर एसीबी का जाल
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने इसे सिर्फ शिकायत मानकर छोड़ नहीं दिया। 1 अक्टूबर को शिकायत और 5 अक्टूबर को पंचों की मौजूदगी में मांग की सत्यता की जांच की गई।एसीबी के मुताबिक जांच के दौरान मंडल अधिकारी मोहिते द्वारा एक लाख रुपये की मांग किए जाने की पुष्टि हुई। वहीं तलाठी कोली ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को रिश्वत देने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके बाद आया 6 अक्टूबर का ऑपरेशन।
रिश्वत लेने के लिए महिला सहायिका को बनाया जरिया?
एसीबी के मुताबिक, मंडल अधिकारी मोहिते ने शिकायतकर्ता को एक लाख रुपये की रकम अपने कार्यालय में काम करने वाली निजी महिला सहायिका मोनिका विज्ञेश पाटील को देने के लिए कहा।
शिकायतकर्ता ने रकम महिला सहायिका को दी। आरोप है कि महिला ने रकम मंडल अधिकारी के कब्जे में पहुंचा दी। इसके बाद एसीबी ने पंचों की मौजूदगी में दोपहर करीब 2 बजे मंडल अधिकारी और महिला सहायिका को रिश्वत की रकम के साथ रंगेहाथ पकड़ लिया।इसके बाद संबंधित तलाठी जय हिंद बिरशा कोली को द्रोणागिरी से करीब 2:45 बजे हिरासत में लिया गया।
सरकारी काम या रिश्वत का रेट?
यह मामला सिर्फ एक लाख रुपये की कथित रिश्वत तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि आम नागरिकों के जमीन रिकॉर्ड से जुड़े कामों के लिए आखिर किस तरह का ‘रेट’ तय किया गया था?अगर 7/12 उतारे पर वारिसों के नाम दर्ज कराने जैसे राजस्व रिकॉर्ड के काम के लिए ही एक लाख रुपये की मांग की जाती है, तो फिर आम नागरिक सरकारी कार्यालयों में अपने वैध काम कराने जाएं तो किस भरोसे पर जाएं?अब एसीबी की जांच में यह सामने आना बाकी है कि रिश्वत की मांग केवल इन अधिकारियों तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था।मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 और 12 के तहत उरण पुलिस थाने में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू है। तीनों आरोपियों को 6 अक्टूबर को कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया गया है।
