
भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी, स्वदेशी तकनीक, व्यावसायीकरण और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के दम पर तेजी से विस्तार कर रहा है। जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 8 अरब डॉलर की मौजूदा भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के 2030 तक लगभग पांच गुना बढ़कर 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इससे वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी करीब 8% हो सकती है। सरकार ने 2040 तक 100 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था बनाने का दीर्घकालिक लक्ष्य भी रखा है।
निजी क्षेत्र के लिए 2020 में खुले दरवाजे
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी के लिए 2020 में रास्ता खोला गया। इसके बाद भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 और उदार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नियमों ने निजी निवेश और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा दिया। देश में अब 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप हैं, जबकि 2014 में इनकी संख्या महज एक थी।
स्टार्टअप विकसित कर रहे नई अंतरिक्ष तकनीक
Skyroot Aerospace, Pixxel, Agnikul Cosmos और Dhruva Space जैसी कंपनियां लॉन्च व्हीकल, उपग्रह, पृथ्वी अवलोकन प्रणाली और अन्य अंतरिक्ष तकनीकों पर काम कर रही हैं। Skyroot का Vikram-1 भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसे लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 350 किलोग्राम तक का पेलोड पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
निजी क्षेत्र के लिए बढ़ी वित्तीय मदद
सरकार ने निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए कई वित्तीय तंत्र शुरू किए हैं। इनमें 1,000 करोड़ रुपए का वेंचर कैपिटल फंड, IN-SPACe सीड फंड के तहत 1 करोड़ रुपए तक की सहायता और 500 करोड़ रुपए का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शामिल हैं।
चंद्र मिशन से मानव अंतरिक्ष उड़ान तक
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब केवल उपग्रह प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है, बल्कि जटिल चंद्र, सौर और मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों तक पहुंच चुका है। अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा। 2027 के लिए प्रस्तावित चंद्रयान-4 का उद्देश्य चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाना है। वहीं, जापान के साथ LUPEX मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास पानी और अन्य वाष्पशील पदार्थों का अध्ययन करेगा।
SpaDeX से जटिल अंतरिक्ष अभियानों की क्षमता मजबूत
जनवरी 2025 में SpaDeX मिशन ने स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग की क्षमता का प्रदर्शन किया। यह तकनीक भविष्य के जटिल अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है और इससे भारत की ऑर्बिटल डॉकिंग क्षमता मजबूत हुई है।
गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पर नजर
भारत गगनयान मिशन की तैयारी भी कर रहा है, जिसका उद्देश्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में तीन दिनों तक भेजना है। प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को 2028 तक स्थापित करने का लक्ष्य है। यह स्टेशन लंबे समय तक मानव अंतरिक्ष अभियानों और माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान में मदद कर सकता है।
अंतरिक्ष कारोबार में तेजी से बढ़ रही कमाई
न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के जरिए अंतरिक्ष क्षेत्र के व्यावसायीकरण को भी गति मिल रही है। कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 में 321.77 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3,246.09 करोड़ रुपए हो गया।
वैश्विक साझेदारियों का बढ़ रहा दायरा
भारत ने 61 देशों और पांच बहुपक्षीय संगठनों के साथ 300 से अधिक अंतरिक्ष सहयोग समझौते किए हैं। नासा के साथ NISAR और जापान के साथ LUPEX जैसे मिशन वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हैं।
वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री हब बनने की तैयारी
बढ़ते लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर, पुन: उपयोग योग्य तकनीकों और निजी कंपनियों के मजबूत होते पारिस्थितिकी तंत्र के साथ भारत अब केवल अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्षम देश बने रहने के बजाय वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
