एफआरआई ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर धोखाधड़ी रोकने में की मदद

दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग के वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (एफआरआई) ने 22 मई 2025 को लॉन्च होने के बाद 15 महीनों में आम नागरिकों की 5,000 करोड़ रुपए से अधिक की रकम संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी में जाने से रोकने में मदद की है। खास बात यह है कि यह रकम नागरिकों के खातों से निकलने के बाद वापस नहीं लाई गई, बल्कि संदिग्ध लेनदेन को स्रोत पर ही रोककर नुकसान होने से बचाया गया।
शुरुआती छह महीनों में 660 करोड़ रुपए की बचत
एफआरआई की शुरुआत के बाद इसके इस्तेमाल का दायरा लगातार बढ़ा है। संचालन के शुरुआती छह महीनों में इस व्यवस्था ने करीब 660 करोड़ रुपए के संभावित नुकसान को रोकने में मदद की थी। अगस्त 2025 में एफआरआई के जरिए रोकी गई रकम का संचयी आंकड़ा 139.16 करोड़ रुपए था, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 5,043.73 करोड़ रुपए हो गया।
चार महीनों में 2,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की रोकथाम
विभाग के अनुसार, अप्रैल 2026 से शुरू हुए केवल चार महीनों में 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संभावित धोखाधड़ी को रोका गया। बैंकों और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्मों में एफआरआई के बढ़ते इस्तेमाल के कारण संदिग्ध लेनदेन की पहचान और रोकथाम की क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई है।
नागरिकों का पैसा खातों से निकलने से पहले बचा
5,000 करोड़ रुपए से अधिक की बचाई गई रकम के पीछे ऐसे लाखों मामले हैं, जिनमें नागरिक संभावित धोखाधड़ी का शिकार होने से बच गए। इनमें फर्जी केवाईसी कॉल के जरिए पेंशनभोगी की बचत हड़पने की कोशिश, फर्जी आपूर्तिकर्ता को भुगतान करने से पहले छोटे व्यापारी को मिली चेतावनी और डिजिटल भुगतान करते समय जोखिम संकेत देखकर लेनदेन रोकने वाले नागरिक शामिल हैं।
दूरसंचार खुफिया जानकारी पर आधारित है एफआरआई
दूरसंचार विभाग की ओर से विकसित एफआरआई एक जोखिम आकलन ढांचा है, जो वित्तीय संस्थानों को वास्तविक समय में यह आकलन करने में मदद करता है कि कोई मोबाइल नंबर साइबर अपराध या वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा होने की कितनी संभावना रखता है। इसे विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) के तहत विकसित किया गया है।
तीन श्रेणियों में जोखिम का आकलन
एफआरआई मोबाइल नंबरों को मध्यम, उच्च और बहुत उच्च जोखिम की श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। इसके लिए संचार साथी पर नागरिकों की ओर से की गई रिपोर्ट, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी), दूरसंचार ऑपरेटरों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिली खुफिया जानकारी तथा अन्य दूरसंचार संबंधी मानकों का इस्तेमाल किया जाता है।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों को मिलती है जानकारी
यह खुफिया जानकारी डीआईपी के माध्यम से बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, बीमा कंपनियों, प्रतिभूति मध्यस्थों और पेंशन क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं के साथ सुरक्षित तरीके से साझा की जाती है। संस्थान नए ग्राहक को जोड़ने, लेनदेन की निगरानी और धोखाधड़ी का पता लगाने वाली अपनी प्रणालियों में इस जोखिम संबंधी जानकारी को शामिल कर सकते हैं।
धोखाधड़ी के बाद कार्रवाई से बेहतर है पहले रोकथाम
साइबर धोखाधड़ी सफल होने के बाद रकम की वसूली करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। धोखाधड़ी से हासिल रकम कुछ ही मिनटों में कई बैंक खातों में स्थानांतरित की जा सकती है और उसके बाद उसे ट्रैक कर वापस लाना मुश्किल हो जाता है। इसके विपरीत, एफआरआई भुगतान शुरू होने के समय ही जोखिम की पहचान करने में मदद करता है।
जांच और वसूली की लंबी प्रक्रिया से बचाव
धोखाधड़ी को सफल होने से पहले रोकने का अर्थ है कि बाद में शिकायत, प्राथमिकी, जांच, खाते पर रोक, रिकॉर्ड की मांग और रकम को ट्रैक करने जैसी प्रक्रियाओं की जरूरत नहीं पड़ती। एफआरआई की मशीन-टू-मशीन व्यवस्था विभिन्न संस्थानों के बीच वास्तविक समय में जोखिम संकेत साझा करती है, जिससे मानव हस्तक्षेप से पहले ही संदिग्ध लेनदेन की पहचान की जा सकती है।
5,000 करोड़ रुपए का आंकड़ा पूरी तस्वीर नहीं बताता
विभाग के अनुसार, 5,000 करोड़ रुपए से अधिक की बचाई गई रकम केवल प्रत्यक्ष वित्तीय बचत को दर्शाती है। इसमें उन शिकायतों, एफआईआर, जांच के घंटों, खातों पर रोक संबंधी नोटिस, दूरसंचार रिकॉर्ड की मांग और नागरिकों को होने वाली परेशानी का मूल्यांकन शामिल नहीं है, जिनकी जरूरत धोखाधड़ी सफल होने की स्थिति में पड़ सकती थी।
कई क्षेत्रों के बीच समन्वय से मजबूत हुई व्यवस्था
वित्तीय धोखाधड़ी अक्सर केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहती। इसकी शुरुआत दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग से हो सकती है और आगे चलकर डिजिटल भुगतान, बैंकिंग, प्रतिभूति, बीमा या पेंशन खातों तक पहुंच सकती है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वित और खुफिया जानकारी आधारित व्यवस्था जरूरी है।
आरबीआई और एनपीसीआई समेत संस्थाओं के साथ सहयोग
दूरसंचार विभाग ने वित्तीय क्षेत्र के नियामकों और हितधारकों के साथ मिलकर एफआरआई के संकेतों को धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम से जुड़े कार्यप्रवाह में शामिल किया है। बैंक और यूपीआई सेवा प्रदाता उच्च और बहुत उच्च जोखिम वाले मोबाइल नंबरों से जुड़े लेनदेन को वास्तविक समय में रोक या चिह्नित कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) तथा अन्य संस्थाओं के साथ सहयोग इस व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
बैंकिंग से आगे बढ़ रहा सुरक्षा का दायरा
एफआरआई आधारित सुरक्षा व्यवस्था को बैंकिंग क्षेत्र से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रतिभूति बाजार के मध्यस्थों के जरिए ट्रेडिंग और डीमैट खातों से जुड़ी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने, बीमा क्षेत्र में पॉलिसी जारी करने और दावों के निपटान के दौरान जोखिम की जांच मजबूत करने तथा पेंशन खातों तक पहुंच और लेनदेन को सुरक्षित बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
1,500 बैंकों और वित्तीय संस्थानों को प्रशिक्षण
एफआरआई से मिले जोखिम संकेतों पर तेजी से कार्रवाई के लिए संस्थागत क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। दूरसंचार विभाग ने एफआरआई की कार्यप्रणाली, डीआईपी एकीकरण और धोखाधड़ी रोकथाम से जुड़े कार्यप्रवाह में जोखिम संकेतों के इस्तेमाल को लेकर 1,500 बैंकों, वित्तीय संस्थानों और नियामकों के लिए 25 से अधिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं।
डीआईपी पर 1,600 से ज्यादा संगठन
डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर 1,600 से अधिक संगठन जुड़े हुए हैं। यह प्लेटफॉर्म दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, बैंकों, वित्तीय संस्थानों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सरकारी विभागों के बीच धोखाधड़ी से जुड़ी कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी साझा करने और समन्वय में मदद करता है।
नागरिकों की रिपोर्टिंग भी अहम
एफआरआई की प्रभावशीलता में नागरिकों की भागीदारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। संचार साथी पोर्टल या मोबाइल एप्लिकेशन पर संदिग्ध कॉल और संदेश की रिपोर्ट करने वाला प्रत्येक नागरिक इस खुफिया तंत्र को मजबूत करने में योगदान देता है। विभाग ने नागरिकों और साइबर योद्धाओं की सतर्कता को इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया है।
भुगतान संबंधी चेतावनियों को नजरअंदाज न करें
विभाग ने नागरिकों से बैंकिंग या यूपीआई एप्लिकेशन पर दिखाई देने वाली भुगतान संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेने की अपील की है। किसी भुगतान को लेकर चेतावनी मिलने पर नागरिकों को लेनदेन रोककर स्वतंत्र रूप से उसकी पुष्टि करने की सलाह दी गई है।
संदिग्ध कॉल और संदेश की करें रिपोर्ट
संदिग्ध कॉल, एसएमएस या व्हाट्सएप संदेश की रिपोर्ट चक्षु सुविधा के जरिए संचार साथी पोर्टल या मोबाइल एप्लिकेशन पर की जा सकती है। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने की स्थिति में नागरिकों को तुरंत 1930 पर कॉल करने या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की सलाह दी गई है। शुरुआती समय में शिकायत करना रकम की वसूली की संभावना बढ़ाने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन भी जांचें
नागरिक संचार साथी के जरिए अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच कर सकते हैं और ऐसे कनेक्शन की रिपोर्ट कर सकते हैं जिन्हें उन्होंने जारी नहीं कराया है। खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट की भी संचार साथी पर रिपोर्ट की जा सकती है, ताकि उन्हें ब्लॉक करने और ट्रैक करने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। नया मोबाइल हैंडसेट खरीदने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचने की भी सलाह दी गई है।
एफआरआई का उद्देश्य सक्रिय सुरक्षा व्यवस्था बनाना
एफआरआई को 22 मई 2025 को डीओटी के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के तहत लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थानों को साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए कार्रवाई योग्य और वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराना है। यह संचार साथी, चक्षु, सीईआईआर और एएसटीआर जैसी नागरिक सुरक्षा पहलों के व्यापक ढांचे का हिस्सा है।
डीआईपी में साझा होती है कार्रवाई योग्य जानकारी
वर्ष 2024 में शुरू किया गया डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म दूरसंचार आधारित साइबर धोखाधड़ी और दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग से निपटने के लिए राष्ट्रव्यापी खुफिया जानकारी साझा करने और समन्वय का सुरक्षित माध्यम है। इसके जरिए मोबाइल नंबर निरस्तीकरण सूची (एमएनआरएल), संदिग्ध धोखाधड़ी वाले मोबाइल नंबरों से जुड़ी एफआरआई जानकारी और अन्य डिजिटल पहचानकर्ताओं से संबंधित सूचनाएं विभिन्न हितधारकों के साथ साझा की जाती हैं।
निरस्त मोबाइल नंबरों पर भी नजर
एमएनआरएल में साइबर अपराध में संलिप्तता, पुन: सत्यापन में विफलता, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के आंतरिक विश्लेषण और निर्धारित कनेक्शन सीमा के उल्लंघन जैसे कारणों से डिस्कनेक्ट किए गए मोबाइल नंबर शामिल किए जाते हैं। इन नंबरों की जानकारी लगभग वास्तविक समय में साझा होने से बैंक और अन्य संस्थान धोखाधड़ी नियंत्रण मजबूत करने तथा निरस्त मोबाइल कनेक्शनों के दुरुपयोग को रोकने में सक्षम होते हैं।
सुरक्षित डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर जोर
दूरसंचार विभाग ने सक्रिय धोखाधड़ी पहचान, खुफिया जानकारी आधारित नीतिगत हस्तक्षेप और विभिन्न सरकारी एजेंसियों तथा निजी क्षेत्र के बीच निरंतर सहयोग के जरिए सुरक्षित डिजिटल भुगतान का माहौल तैयार करने की प्रतिबद्धता जताई है। नागरिकों को संचार साथी पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए उपलब्ध नागरिक-केंद्रित सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।
