कॉमनवेल्थ गेम्स में लवलीना बोर्गोहेन पर भारत की सबसे बड़ी उम्मीद, गोल्ड जीतकर अधूरा सपना पूरा करने का लक्ष्य

ग्लासगो में आयोजित 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजी दल की अगुवाई देश की सबसे अनुभवी और सफल महिला मुक्केबाजों में शामिल लवलीना बोर्गोहेन कर रही हैं। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता, विश्व चैंपियन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सबसे भरोसेमंद मुक्केबाजों में शुमार लवलीना इस बार उस कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक को जीतने के इरादे से उतरी हैं, जो अब तक उनके शानदार करियर में शामिल नहीं हो सका है।
महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा कर रहीं लवलीना को भारत की सबसे मजबूत पदक दावेदार माना जा रहा है। असम के गोलाघाट जिले के बारोमुखिया गांव से निकलकर विश्व मुक्केबाजी के शीर्ष स्तर तक पहुंचने वाली लवलीना का सफर संघर्ष, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की मिसाल रहा है। किकबॉक्सिंग से खेल की शुरुआत करने वाली लवलीना की प्रतिभा को वर्ष 2012 में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के टैलेंट सर्च कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध कोच पदुम बोरो ने पहचाना था।
टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर लवलीना ओलंपिक मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली भारत की तीसरी और महिला वर्ग में मैरी कॉम के बाद दूसरी भारतीय मुक्केबाज बनीं। बाद में उन्होंने ओलंपिक भार वर्गों में बदलाव के बाद 69 किलोग्राम से 75 किलोग्राम वर्ग में सफलतापूर्वक कदम रखा और विश्व चैंपियनशिप सहित कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित की।
हालांकि, कॉमनवेल्थ गेम्स ऐसा प्रमुख मंच है जहां स्वर्ण पदक जीतने का उनका सपना अभी अधूरा है। ग्लासगो 2026 में वह इसी कमी को पूरा करना चाहती हैं। खेलों से पहले लवलीना ने कहा था कि कॉमनवेल्थ स्वर्ण जीतना उनके सबसे बड़े लक्ष्यों में शामिल है और इसके लिए उन्होंने पिछले कई महीनों से तकनीक, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया है।
लवलीना के अभियान की शुरुआत सकारात्मक रही है। महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में प्रतिभागियों की संख्या कम होने के कारण उन्हें सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश मिला है। कॉमनवेल्थ गेम्स के प्रारूप के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले दोनों हारने वाले मुक्केबाजों को कांस्य पदक मिलता है। ऐसे में लवलीना ने रिंग में उतरे बिना ही भारत के लिए मुक्केबाजी का पहला पदक सुनिश्चित कर दिया है।
हालांकि, उनके लिए केवल पदक जीतना पर्याप्त नहीं है। उनका लक्ष्य स्वर्ण पदक हासिल करना है। यदि वह सेमीफाइनल जीतती हैं तो कम से कम रजत पदक पक्का हो जाएगा और फिर फाइनल में जीत के साथ वह अपने करियर की उपलब्धियों में कॉमनवेल्थ स्वर्ण भी जोड़ सकती हैं। यह उपलब्धि उनके ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप पदकों के साथ उनके शानदार करियर को और अधिक पूर्ण बना देगी।
लवलीना आज देशभर के युवा खिलाड़ियों, विशेषकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि प्रतिभा, मेहनत और सही मार्गदर्शन के दम पर कोई भी खिलाड़ी विश्व स्तर पर सफलता हासिल कर सकता है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वजवाहक बनने के साथ उन्होंने भारतीय महिला खिलाड़ियों के बढ़ते आत्मविश्वास और सफलता का भी प्रतिनिधित्व किया।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का मुक्केबाजी में प्रदर्शन हमेशा मजबूत रहा है और इस बार भी देश को लवलीना से स्वर्ण पदक की उम्मीद है। उनकी तकनीकी दक्षता, रणनीतिक समझ और दबाव में शांत रहने की क्षमता उन्हें प्रतियोगिता की सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल करती है।
ग्लासगो में चल रहे इन खेलों में लवलीना बोर्गोहेन एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब हैं। यदि वह स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहती हैं तो यह केवल एक और अंतरराष्ट्रीय खिताब नहीं होगा, बल्कि उनके शानदार करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जाएगा और भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास में उनका स्थान और भी मजबूत हो जाएगा।
