पेयजल और स्वच्छता विभाग ने ‘सुजल ग्राम संवाद’ के 9वें संस्करण का आयोजन किया

जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने शुक्रवार को बहुभाषी ‘सुजल ग्राम संवाद’ के नौवें संस्करण का आयोजन किया। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत आयोजित इस वर्चुअल संवाद में आठ राज्यों की ग्राम पंचायतों ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों के नेतृत्व में समुदाय आधारित दीर्घकालिक जल सुरक्षा और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के टिकाऊ संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम) को मजबूत करना था।
विभिन्न राज्यों की ग्राम पंचायतों ने साझा किए अनुभव
इस संवाद में तमिलनाडु, बिहार, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड और छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों ने अपनी स्थानीय भाषाओं में जल जीवन मिशन के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC), जल सखियों, जल वाहिनियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, छात्रों और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने पर जोर
डीडीडब्ल्यूएस के सचिव अशोक के.के. मीणा ने कहा कि ‘सुजल ग्राम संवाद’ ग्राम पंचायतों के अनुभवों और नवाचारों से सीखने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने 73वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता की जिम्मेदारी पंचायती राज संस्थाओं को सौंपी गई है, इसलिए ग्राम पंचायतों को कोष, कार्य और कर्मचारियों (3F) का प्रभावी हस्तांतरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक सफलता के लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के माध्यम से महिलाओं, युवाओं और पूर्व सैनिकों सहित समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
जल जीवन मिशन से बदली गांवों की तस्वीर
संवाद के दौरान विभिन्न ग्राम पंचायतों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन मिलने से सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता बढ़ी है और महिलाओं को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने की परेशानी से राहत मिली है। कई पंचायतों ने उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह, स्थानीय प्लंबर और पंप ऑपरेटरों की नियुक्ति, व्हाट्सऐप समूहों के माध्यम से शिकायत निवारण तथा फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) से नियमित जल गुणवत्ता जांच जैसे मॉडल अपनाए हैं।
स्रोत संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष ध्यान
जम्मू-कश्मीर, मिजोरम और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों की पंचायतों ने प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, ग्रे-वॉटर प्रबंधन, सोक पिट निर्माण और जल संरक्षण अभियानों की जानकारी दी। जिला प्रशासन ने भी स्रोत स्थिरता, वन विभाग और अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण तथा दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों तक पाइप जलापूर्ति पहुंचाने के प्रयासों की जानकारी साझा की।
संचालन और रखरखाव के लिए स्थानीय मॉडल
हरियाणा, झारखंड और तमिलनाडु की पंचायतों ने बताया कि नियमित उपयोगकर्ता शुल्क से जल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव का खर्च उठाया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं जल गुणवत्ता की निगरानी कर रही हैं, जबकि ग्राम सभाओं के माध्यम से जल संरक्षण और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जल स्रोतों की दीर्घकालिक सुरक्षा पर जोर
राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं प्रबंध निदेशक कमल किशोर सोन ने जिलाधिकारियों और ग्राम पंचायतों की सराहना करते हुए कहा कि 16वें वित्त आयोग के अनुदान का प्रभावी उपयोग जल आपूर्ति योजनाओं की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने नियमित जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (DWSM) बैठकों, जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन तथा ‘जल अर्पण’ कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने ग्राम प्रधानों से ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर जल योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और ग्राम सभा के माध्यम से योजनाओं की स्थिति समुदाय के साथ साझा कर पारदर्शिता और सामुदायिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
