एपीडा की पहल से बिहार के मखाने को वैश्विक बाजार में मिली नई पहचान, कनाडा के लिए फ्लेवर वाले मखाने की पहली समुद्री खेप रवाना

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने बिहार के दरभंगा से कनाडा के लिए वैल्यू-एडेड फ्लेवर वाले मखाने (फॉक्स नट्स) की पहली समुद्री खेप रवाना कर एक नई उपलब्धि हासिल की है। 29 जुलाई 2026 को रवाना की गई इस खेप को एपीडा ने हरी झंडी दिखाई। इस पहल से बिहार के प्रीमियम कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलने के साथ ही वैल्यू-एडेड निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
दो कंटेनरों में भेजा गया सात मीट्रिक टन मखाना
दो कंटेनरों में पैक किए गए सात मीट्रिक टन फ्लेवर वाले मखाने को मुंद्रा बंदरगाह के जरिए कनाडा की जेडकेवी फूड्स को भेजा गया। मखाने की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग न्यूट्रीविन एग्रो प्राइवेट लिमिटेड ने अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप की। यह बिहार की खाद्य प्रसंस्करण, वैल्यू-एडिशन और निर्यात क्षमता में हो रही प्रगति को भी दर्शाता है।
एपीडा अध्यक्ष ने सामूहिक प्रयासों की सराहना की
ध्वजारोहण समारोह में एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने निर्यातकों, प्रसंस्करणकर्ताओं, किसानों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और एपीडा अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल बिहार के कृषि-निर्यात तंत्र को मजबूत कर रही है, वैल्यू-एडेड कृषि उत्पादों को बढ़ावा दे रही है और राज्य की विशिष्ट कृषि उपज के लिए वैश्विक बाजारों के नए अवसर खोल रही है।
कार्यक्रम में कई विशेषज्ञ और अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में दरभंगा स्थित मखाना अनुसंधान केंद्र में आईसीएआर के पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर के वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार, जिला कृषि मार्केटिंग अधिकारी लोकनाथ ठाकुर, एपीडा के वरिष्ठ अधिकारी तथा मखाना मूल्य श्रृंखला से जुड़े निर्यातक और अन्य हितधारक मौजूद रहे।
वैश्विक बाजार में बढ़ रही बिहार के मखाने की मांग
मखाना, जिसे फॉक्स नट्स के नाम से भी जाना जाता है, बिहार का प्रमुख कृषि उत्पाद है और भारत के कुल उत्पादन में राज्य की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। अपने पौष्टिक गुणों और उच्च गुणवत्ता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। फ्लेवर वाले मखाने के निर्यात से नए बाजारों तक पहुंच बढ़ने के साथ इस उत्पाद की वैश्विक पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है।
किसानों को 50% से अधिक अतिरिक्त लाभ
वैल्यू-एडेड फ्लेवर वाले मखाने के निर्यात से जुड़े किसानों की आय में 50% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात आधारित मूल्यवर्धन के माध्यम से भारतीय कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सकती है और किसानों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ा जा सकता है।
बिहार को कृषि-निर्यात हब बनाने पर एपीडा का जोर
एपीडा क्षमता निर्माण, निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, गुणवत्ता अनुपालन, बाजार संपर्क और वैल्यू-एडिशन के माध्यम से बिहार को अग्रणी कृषि-निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। राज्य सरकारों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), निर्यातकों, प्रसंस्करणकर्ताओं और अन्य हितधारकों के सहयोग से संस्था गुणवत्ता आश्वासन, निर्यात सुविधा और बाजार विकास को मजबूत कर रही है। कनाडा के लिए फ्लेवर वाले मखाने की पहली समुद्री खेप इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जिससे किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और निर्यातकों के लिए स्थायी आय के नए अवसर पैदा होंगे
