उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आईएनएस समर्थक का किया शुभारंभ, 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है पोत
कर्नाटक के कारवार में शुक्रवार को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत आईएनएस समर्थक का शुभारंभ किया। 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित यह पोत रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और उन्नत नौसैनिक क्षमताओं के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम
उपराष्ट्रपति ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आईएनएस समर्थक भारत की औद्योगिक, तकनीकी और जहाज निर्माण क्षमताओं की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब केवल एक आकांक्षा नहीं, बल्कि वास्तविकता बन रही है। यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी आगे बढ़ाती है।
भारत की गौरवशाली समुद्री विरासत का उल्लेख
सीपी राधाकृष्णन ने भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का उल्लेख करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज और चोल वंश की नौसैनिक परंपराओं को याद किया। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं ने हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के समुद्री प्रभाव के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समुद्री सुरक्षा में नौसेना की भूमिका की सराहना
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय संप्रभुता और समुद्री हितों की रक्षा में भारतीय नौसेना की सेवाओं की सराहना की। उन्होंने समुद्री डकैती के खिलाफ अभियानों, भारतीय नागरिकों की निकासी तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में नौसेना के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता और पसंदीदा सुरक्षा भागीदार के रूप में नौसेना की भूमिका की भी प्रशंसा की।
आधुनिक तकनीकों के परीक्षण में मददगार होगा आईएनएस समर्थक
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईएनएस समर्थक अगली पीढ़ी के हथियारों, सेंसर और उभरती प्रौद्योगिकियों के परीक्षण एवं मूल्यांकन के लिए एक बहुउद्देशीय मंच के रूप में काम करेगा। यह पोत समुद्री निगरानी और टोही, अपतटीय गश्त, लक्ष्यों के प्रक्षेपण और पुनर्प्राप्ति, मानवरहित प्रणालियों से जुड़े अभियानों तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह का मंच नौसेना को तेजी से विकसित हो रही तकनीकों के अनुरूप अपनी क्षमताओं को उन्नत करने और स्वदेशी नवाचार को व्यावहारिक परिचालन क्षमताओं में बदलने में मदद करेगा।
कारवार का रणनीतिक महत्व रेखांकित किया
सीपी राधाकृष्णन ने कारवार के गहरे प्राकृतिक बंदरगाह और अरब सागर से इसकी निकटता को भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रोजेक्ट सीबर्ड के तहत विकसित हो रहे आधुनिक नौसैनिक बुनियादी ढांचे का उल्लेख किया। इस परियोजना से नौसेना की जहाजों और पनडुब्बियों को तैनात करने तथा उनका रखरखाव करने की क्षमता बढ़ रही है। साथ ही, इससे क्षेत्र में व्यापक आर्थिक अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
निजी जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती भूमिका
उपराष्ट्रपति ने भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र को मजबूत बनाने में भारतीय नौसेना, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी शिपयार्डों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), शिक्षण संस्थानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्टअप के बीच बढ़ते सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आईएनएस समर्थक के निर्माण में लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के योगदान का उल्लेख करते हुए नौसेना के डिजाइनरों, उत्पादन अधिकारियों, शिपयार्ड कर्मियों, इंजीनियरों, तकनीशियनों, आपूर्तिकर्ताओं और सहायक उद्योगों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आईएनएस समर्थक भारत के निजी जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती भूमिका को भी प्रदर्शित करता है।
नौसेना और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सयान, युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण नियंत्रक वाइस एडमिरल संजय साधु, फ्लैग ऑफिसर (कर्नाटक) रियर एडमिरल विक्रम मेनन और एलएंडटी के जहाज निर्माण प्रमुख सेवानिवृत्त रियर एडमिरल जीके हरीश मौजूद रहे। इसके अलावा आईएनएस समर्थक के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर सुशील कुमार सिंह, भारतीय नौसेना और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य विशिष्ट अतिथि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।


