ब्रिक्स सम्मेलन में दिखी राजस्थान की कला, पीयूष गोयल ने गणमान्य व्यक्तियों को दिए सांगानेरी शॉल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित ब्रिक्स व्यापार एवं उद्योग मंत्रियों की बैठक में गणमान्य व्यक्तियों को हस्तनिर्मित जयपुर सांगानेरी शॉल भेंट कर भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया।
‘गर्व से भारतीय, गर्व से सांगानेरी’
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पहल को साझा करते हुए लिखा, ‘गर्व से भारतीय, गर्व से सांगानेरी।’ उन्होंने कहा कि राजस्थान की सदियों पुरानी वस्त्र परंपरा और स्थानीय कारीगरों की शिल्पकारी को श्रद्धांजलि के रूप में उन्होंने ये हस्तनिर्मित शॉल बैठक में मौजूद मंत्रियों और प्रतिनिधियों को भेंट किए।
कारीगरों की शिल्पकारी को बताया कालातीत विरासत
गोयल ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर उन्होंने ब्रिक्स इंडिया 2026 व्यापार एवं उद्योग मंत्रियों की बैठक में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को सुंदर हस्तनिर्मित जयपुर सांगानेरी शॉल भेंट किए। उन्होंने कहा कि देश के कुशल कारीगर अद्वितीय और कालातीत शिल्पकारी की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
ब्रिक्स बैठक के साथ हुआ सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन
सांगानेरी शॉल की यह प्रतीकात्मक प्रस्तुति भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत आयोजित 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक के सफल समापन के साथ हुई। बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने आर्थिक सहयोग मजबूत करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ बनाने और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में सुधार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
हस्त-ब्लॉक प्रिंटिंग और प्राकृतिक रंग सांगानेरी की पहचान
अपनी जटिल हस्त-ब्लॉक प्रिंटिंग, प्राकृतिक रंगों और आकर्षक पुष्प आकृतियों के लिए प्रसिद्ध सांगानेरी शॉल राजस्थान की प्रतिष्ठित पारंपरिक शिल्पकलाओं में शामिल हैं। जयपुर के निकट सांगानेर से विकसित हुई यह वस्त्र कला अपनी विशिष्ट कारीगरी के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है।
हजारों कारीगर परिवारों को मिलता है रोजगार
सांगानेरी शिल्प परंपरा लंबे समय से स्थानीय कारीगर समुदायों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार रही है। इसकी विशिष्ट डिजाइन और पारंपरिक तकनीकों ने इसे राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने के साथ देश की हस्तशिल्प विरासत में भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है।
‘वोकल फॉर लोकल’ को मिला प्रोत्साहन
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के लिए स्थानीय स्तर पर निर्मित सांगानेरी शॉल को आधिकारिक उपहार के रूप में चुनना सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल के तहत स्वदेशी शिल्प और हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी दर्शाता है।
हथकरघा बुनकरों और कारीगरों को समर्पित दिवस
हर साल 7 अगस्त को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस भारत की सदियों पुरानी बुनाई परंपराओं का सम्मान करता है। यह देश की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत में हथकरघा बुनकरों और कारीगरों के योगदान को भी रेखांकित करता है।
वैश्विक मंच पर भारतीय शिल्प की पहचान
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के लिए सांगानेरी शॉल का चयन कर भारत ने राजस्थान की कलात्मक उत्कृष्टता को प्रदर्शित करने के साथ वैश्विक मंचों पर पारंपरिक शिल्पकलाओं के संरक्षण और संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की।
स्थानीय कारीगरों के समर्थन का संदेश
इस पहल ने स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी शिल्प को समर्थन देने के संदेश को मजबूत किया। साथ ही, ब्रिक्स समूह में भारत की बढ़ती नेतृत्व भूमिका के साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तकरघा विरासत को भी वैश्विक प्रतिनिधियों के सामने रेखांकित किया गया।
