लखपति दीदी पहल से 3.46 करोड़ से अधिक महिलाओं को मिला लाभ, एसएचजी के जरिए बढ़ रही आय और आत्मनिर्भरता

केंद्र सरकार ने बताया है कि दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत संचालित लखपति दीदी पहल के माध्यम से अब तक देशभर में 3.46 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में सक्षम बनाया गया है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को कम से कम चार कृषि मौसमों और/या व्यावसायिक चक्रों तक सतत आधार पर न्यूनतम एक लाख रुपए वार्षिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है।
डीएवाई-एनआरएलएम के तहत 10.08 करोड़ ग्रामीण परिवार जुड़े
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों (चंडीगढ़ और दिल्ली को छोड़कर) के सहयोग से संचालित डीएवाई-एनआरएलएम का उद्देश्य गरीब ग्रामीण परिवारों की आजीविका में सुधार करना और उन्हें सामाजिक एवं वित्तीय रूप से सशक्त बनाना है। इसके तहत देशभर में 10.08 करोड़ ग्रामीण परिवारों को करीब 92 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया गया है। मध्य प्रदेश में 23,67,520 एसएचजी सदस्यों को लखपति दीदी बनाया गया है, जिनमें छिंदवाड़ा जिले के लगभग 46,000 सदस्य शामिल हैं।
एसवीईपी से ग्रामीण महिलाओं को मिल रही उद्यमिता की ताकत
मंत्रालय ने बताया कि डीएवाई-एनआरएलएम के तहत स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (एसवीईपी) के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों और उनके परिवारों को गैर-कृषि क्षेत्र में छोटे उद्यम स्थापित करने के लिए सहायता दी जा रही है। इस योजना के तहत प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, सामुदायिक उद्यम निधि (सीईएफ) के जरिए वित्तपोषण और व्यवसाय संबंधी सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। जून 2026 तक देशभर में 4.32 लाख उद्यमों को सहायता दी गई है, जिनमें मध्य प्रदेश के 30,573 उद्यम शामिल हैं।
ऋण और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर
डीएवाई-एनआरएलएम के तहत स्वयं सहायता समूहों को परिक्रामी निधि (आरएफ) और सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) उपलब्ध कराई जाती है, जिससे सदस्य विभिन्न जरूरतों के लिए ऋण प्राप्त कर सकें। इसके अलावा रियायती ब्याज दर पर बैंक ऋण उपलब्ध कराने के लिए बैंक लिंकेज की सुविधा भी दी जाती है। वर्ष 2013-14 से अब तक एसएचजी को 13.41 लाख करोड़ रुपए का बैंक ऋण उपलब्ध कराने में सहायता की गई है। साथ ही, महिलाओं को लेखांकन, रिकॉर्ड-कीपिंग, बजट निर्माण, ऋण प्रबंधन और वित्तीय साक्षरता का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
बीसी सखी मॉडल से बढ़ रहा डिजिटल वित्त
सरकार ने बताया कि डीएवाई-एनआरएलएम के तहत वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए बैंकों और सामान्य सेवा केंद्रों के सहयोग से एसएचजी महिलाओं को बैंकिंग करेस्पोंडेंट सखी (बीसी सखी) के रूप में तैनात किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग सेवाओं और वित्तीय साक्षरता का विस्तार हो रहा है।
प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी फोकस
डीएवाई-एनआरएलएम के तहत सभी राज्यों में स्वयं सहायता समूहों के प्रभावी संचालन के लिए नियमित प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें एसएचजी प्रबंधन, वित्तीय साक्षरता, आजीविका संवर्धन और उद्यम विकास जैसे विषय शामिल हैं, ताकि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
ब्रांडिंग और मार्केटिंग से मिल रही बाजार तक पहुंच
मंत्रालय ने बताया कि एसएचजी उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए “सरस”, “सरस आजीविका” और “आजीविका” ब्रांड विकसित किए गए हैं। इसके अलावा 25 राज्यों ने अपने-अपने राज्य स्तरीय ब्रांड भी तैयार किए हैं, जिनमें महाराष्ट्र का ‘उमेद’, झारखंड के ‘पलाश’ और ‘आदिवा’, हिमाचल प्रदेश का ‘हिमीरा’ तथा तमिलनाडु का ‘माठी’ शामिल हैं।
सरस मेले और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से बढ़ी बिक्री
एसएचजी उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तर पर सरस मेलों का आयोजन किया जाता है। हर वर्ष दो राष्ट्रीय सरस मेले, एक सरस खाद्य उत्सव और 50 से अधिक राज्य स्तरीय सरस मेले आयोजित किए जाते हैं। मंत्रालय मध्य दिल्ली में सरस आजीविका गैलरी का भी संचालन करता है। इसके अलावा ई-सरस ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है तथा जेम, ओएनडीसी, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मीशो और जियोमार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी कर एसएचजी उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है।
लोकसभा में दी गई जानकारी
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने यह जानकारी मंगलवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी
