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ब्रिक्स फोरम 2026: एआई, जलवायु और खाद्य सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने पर जोर

cennews
Last updated: July 24, 2026 10:23 pm
By cennews
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ब्रिक्स फोरम 2026: एआई, जलवायु और खाद्य सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने पर जोर
ब्रिक्स फोरम 2026: एआई, जलवायु और खाद्य सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने पर जोर
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ब्रिक्स फोरम 2026: एआई, जलवायु और खाद्य सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने पर जोर

ब्रिक्स फोरम 2026: एआई, जलवायु और खाद्य सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने पर जोर

सतत विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग और वैश्विक दक्षिण के बीच वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत बनाने पर केंद्रित ब्रिक्स विज्ञान अकादमियों फोरम बैठक-2026 का दो दिवसीय आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) हैदराबाद में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। बैठक में भारत समेत ब्रिक्स के आठ सदस्य देशों और पांच साझेदार देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा एआई के जिम्मेदार, समावेशी और सहयोगात्मक उपयोग पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

एआई के 3C दृष्टिकोण पर जोर

फोरम की शुरुआत ‘सतत विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग और वैश्विक दक्षिण सहयोग को सुदृढ़ बनाना’ विषय के साथ हुई। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के अध्यक्ष प्रो. शेखर मांडे ने कहा कि एआई वैश्विक और वैश्विक दक्षिण की प्रमुख चुनौतियों के समाधान में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने एआई प्रणालियों को नैतिक, समावेशी, पारदर्शी और सभी सामाजिक-आर्थिक वर्गों के लिए सुलभ बनाए रखने पर जोर दिया। आईएनएसए के उपाध्यक्ष डॉ. देबाशीष मित्रा ने बहुपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता बताई, जबकि आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. बी.एस. मूर्ति ने संस्थान की एआई संबंधी पहलों की जानकारी दी।

पांच प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान

बैठक में एआई आधारित सहयोग के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई। इनमें उन्नत सामग्री एवं विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरणीय सततता, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा तथा आपदा पूर्वानुमान एवं प्रबंधन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में एआई के माध्यम से अनुसंधान, निर्णय-निर्माण, पूर्वानुमान क्षमता और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने पर सहमति बनी।

सदस्य देशों ने साझा किए अपने अनुभव

आईआईटी दिल्ली के प्रो. अंबुज सागर ने फोरम की विषयगत रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके बाद विभिन्न देशों की विज्ञान अकादमियों ने अपने-अपने दृष्टिकोण रखे। ब्राजील ने स्वास्थ्य, जलवायु और खाद्य सुरक्षा के लिए समावेशी एआई पर जोर दिया। चीन ने डेटा साझाकरण, सत्यापन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण का समर्थन किया। मिस्र ने क्षमता निर्माण और ब्रिक्स एआई नेटवर्क की स्थापना का प्रस्ताव रखा। इथियोपिया ने साइबर सुरक्षा, एआई शिक्षा और भाषाई विविधता पर बल दिया। इंडोनेशिया ने एआई की व्याख्यात्मकता और नैतिक जोखिमों पर चर्चा की, जबकि रूस ने विश्वसनीय एवं पारदर्शी एआई प्रणालियों तथा उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना का समर्थन किया। दक्षिण अफ्रीका ने डिजिटल विभाजन कम करने पर जोर दिया। नाइजीरिया ने नैतिक एआई और डेटा आधारित योजना निर्माण, वियतनाम ने रोजगार, स्थानीय डेटा और पर्यावरणीय प्रभाव, बेलारूस ने टेलीमेडिसिन और डेटा सुरक्षा तथा कज़ाखस्तान ने प्रौद्योगिकी तक पहुंच, एसडीजी के अनुरूप विकास और युवा वैज्ञानिकों के समर्थन की आवश्यकता रेखांकित की।

प्लेनरी व्याख्यानों में स्वास्थ्य, सामग्री विज्ञान और हरित हाइड्रोजन पर चर्चा

आईएनएसए के उपाध्यक्ष प्रो. अनुराग अग्रवाल ने “व्हाई एआई इन हेल्थकेयर? (एंड व्हेन नॉट टू यूज़ इट)” विषय पर प्लेनरी व्याख्यान दिया। दूसरे दिन आईएनएसए के उपाध्यक्ष प्रो. इंद्रनील मन्ना ने सामग्री खोज, डेटा विश्लेषण और भौतिकी आधारित मॉडलिंग में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं, सीएसआईआर-एनसीएल के निदेशक डॉ. आशीष लेले ने हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा संक्रमण, हरित लॉजिस्टिक्स और डीकार्बोनाइज्ड डेटा सेंटरों में एआई की उपयोगिता पर मुख्य व्याख्यान दिया।

संयुक्त वक्तव्य को अंतिम रूप

समापन दिवस पर आईएनएसए के अध्यक्ष प्रो. शेखर मांडे की अध्यक्षता में संयुक्त वक्तव्य पर विस्तृत चर्चा हुई। सदस्य और साझेदार देशों की विज्ञान अकादमियों ने सर्वसम्मति से कम्युनिके के मसौदे को अंतिम रूप दिया। इस संयुक्त वक्तव्य को एक सप्ताह के भीतर अनुमोदित किए जाने की संभावना है और इसे अगस्त 2026 में होने वाली ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) मंत्रिस्तरीय बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।

विज्ञान को बताया सतत विकास का आधार

संयुक्त सचिव (एमईआर एवं जी-20) तथा ब्रिक्स सू-शेरपा शंभुलिंगप्पा हक्की ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति और साक्ष्य-आधारित लोक नीति के लिए विज्ञान एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने सर्वसम्मति से तैयार कम्युनिके की सराहना करते हुए कहा कि यह मानव-केंद्रित विकास की भारत की परिकल्पना के अनुरूप है। कार्यक्रम का समापन आईएनएसए के कार्यकारी निदेशक डॉ. ब्रजेश पांडेय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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