रामपुर में 5 फर्जी अस्पताल और नर्सिंग होम सील, स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन
रामपुर में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन: 5 फर्जी अस्पताल और नर्सिंग होम सील, संचालकों पर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी
रामपुर, उत्तर प्रदेश। जिले में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों और नर्सिंग होम के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा अभियान चलाते हुए पांच फर्जी अस्पतालों और नर्सिंग होम को सील कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से अवैध चिकित्सा संस्थानों में हड़कंप मच गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. दीपा सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि जिले में बिना मान्यता, बिना आवश्यक दस्तावेजों और बिना योग्य चिकित्सकों के संचालित हो रहे अस्पतालों, पैथोलॉजी लैब और क्लीनिकों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अवैध तरीके से संचालित किसी भी अस्पताल को बख्शा नहीं जाएगा और रोजाना कार्रवाई जारी रहेगी।
सीएमओ ने बताया कि इस अभियान के लिए नोडल अधिकारी देवेश चौधरी और टांडा चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सत्यपाल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके नेतृत्व में टांडा तहसील क्षेत्र में संचालित पांच अवैध अस्पतालों और नर्सिंग होम को सील किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई के दौरान फर्जी अस्पतालों के संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करते हुए मुकदमा दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर भी सौंप दी है।
पहले भी हो चुकी हैं कई कार्रवाई
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य विभाग जिलेभर में अवैध अस्पतालों, झोलाछाप डॉक्टरों और बिना लाइसेंस संचालित चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ अभियान चला रहा है। इससे पहले भी कई अस्पतालों को सील किया जा चुका है।
हालांकि, इस कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि जब अस्पतालों को सील कर दिया जाता है, तो कुछ समय बाद उनका संचालन दोबारा कैसे शुरू हो जाता है? स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर सील तोड़कर फिर से अस्पताल चलाए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की सख्त चेतावनी
सीएमओ डॉ. दीपा सिंह ने कहा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। बिना डिग्री, बिना पंजीकरण और बिना आवश्यक अनुमति के चिकित्सा सेवाएं देने वालों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को जिले में फर्जी चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ एक बड़ी पहल माना जा रहा है। अब देखना होगा कि विभाग की यह मुहिम कितनी प्रभावी साबित होती है और अवैध अस्पतालों पर पूरी तरह लगाम लग पाती है या नहीं।
बाइट: डॉ. दीपा सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), रामपुर
रिपोर्ट: परवेज़ अली, रामपुर (उत्तर प्रदेश)
