CBI vs CBI: आलोक वर्मा को SC से बड़ी राहत, CBI निदेशक पर बने रहेंगे; नहीं ले सकेंगे नीतिगत फैसले

CBI vs CBI सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि आलोक वर्मा को हटाने से पहले सलेक्ट कमेटी से सहमति लेना चाहिए।

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नई दिल्ली (माला दीक्षित)। सीबीआई बनाम सीबीआई के चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया ।जस्टिस संजय किशन कौल ने सरकार के आदेश के खिलाफ अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि आलोक वर्मा को हटाने से पहले सलेक्ट कमेटी से सहमति लेना चाहिए।

कोर्ट ने केंद्र के फैसले को पलटते हुए आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का आदेश निरस्त किया। आलोक वर्मा को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है और वह CBI निदेशक पर पर बने रहेंगे। सुप्रीम फैसले के बाद आलोक वर्मा के वकील ने कहा- हमें कोर्ट पर पूरा भरोसा था। इस फैसले ने यह साबित किया जब तक कोर्ट है तब तक किसी के साथ कुछ गलत नहीं होगा। यह फैसला संवैधानिक संस्थाओं की जीत है।

हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि आलोक वर्मा अभी नीतिगत फैसले नहीं लेंगे सिर्फ सीबीआई का रोज़ाना का कामकाज देखेंगे। कोर्ट ने कहा आलोक वर्मा पर लगे आरोपों के आधार पर हाई पावर कमेटी एक हफ़्ते के भीतर फैसला लेगी।

सिर्फ हाई पावर कमेटी करेगी वर्मा पर फैसला
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को कानून के तहत सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का कोई अधिकार नहीं है सिर्फ सेलेक्ट कमेटी के पास ही ये अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई पावर सेलेक्ट कमेटी में प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में नेता विपक्ष होंगे। कोर्ट ने ये भी कहा कि ये कमेटी एक हफ्ते के भीतर वर्मा पर कार्रवाई पर फैसला ले। इस दौरान आलोक वर्मा कोई भी नीतिगत फैसला नहीं लेंगे। कोर्ट ने ये भी कहा कि आगे से ऐसे बड़े मामलों में उच्च स्तरीय कमेटी ही फैसला करेगी।

बता दें कि सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा ने पूर्व जॉइंट डायरेक्टर राकेश अस्थाना के साथ विवाद के चलते शक्तियां छीने जाने और छुट्टी पर भेजने के खिलाफ याचिका दायर की थी। अस्थाना और वर्मा के बीच करप्शन को लेकर छिड़ी जंग के सार्वजनिक होने के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया था।

23 अक्टूबर को सरकार ने भेजा था अवकाश पर
वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग सार्वजनिक होने के बाद सरकार ने पिछले साल 23 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेज दिया था। दोनों अधिकारियों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके साथ ही केंद्र ने ब्यूरो के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को जांच एजेंसी के निदेशक का अस्थायी कार्यभार सौंप दिया था।

छह दिसंबर को याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई थी
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, संजय किशन कौल और केएम जोसेफ की पीठ ने पिछले साल छह दिसंबर को याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली थी। पीठ ने वर्मा, केंद्र सरकार, केंद्रीय सतर्कता आयोग और अन्य की दलील सुनने के बाद कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा। कोर्ट ने गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की याचिका पर भी सुनवाई की थी। इस संगठन ने न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से राकेश अस्थाना सहित जांच ब्यूरो के तमाम अधिकारियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का अनुरोध किया था।

न्यायालय ने जांच ब्यूरो की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्रीय सतर्कता आयोग को कैबिनेट सचिव से मिले पत्र में लगाए गए आरोपों की जांच दो सप्ताह के भीतर पूरी करके अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपने का निर्देश दिया था। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश एके पटनायक को सीवीसी जांच की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था।

कांग्रेस ने कहा- सरकार को सबक
सीबीआइ विवाद में सुप्रीम फैसले पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सरकार को एक सबक सिखाया। आलोक वर्मा के पास राफेल की फाइल आने वाली थी इसलिए केंद्र सरकार ने जल्दबाजी में उनको हटाने का फैसला लिया।

केजरीवाल ने राफेल से जोड़ा केस
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश की सभी संस्थाओं को बर्बाद कर दिया है। केजरीवाल ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या राफेल घोटाले की जांच रोकने के लिए कोर्ट ने आधी रात को सीबीआई डायरेक्टर को नहीं हटाया?

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