सिद्धार्थनगर में किसानों के खेती के प्रमुख साधन जो अंग्रेजों के शासन काल मे बारिश या फिर नहरों के द्वारा सिचाई के व्यापक प्रबन्ध किए गए थे।

सिद्धार्थनगर की 70 फीसदी आबादी कृषि पर आश्रित है जिसकी सिचाई की ब्यवस्था के लिए अंग्रेजों ने सागरों की व्यवस्था और सिचाई के लिए नहरों को स्थापना की थी ताकी किसानों को खेती के लिए कोई परेशानी न हो।

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सिद्धार्थनगर में किसानों के खेती के प्रमुख साधन जो अंग्रेजों के शासन काल मे बारिश या फिर नहरों के द्वारा सिचाई के व्यापक प्रबन्ध किए गए थे। लेकिन आज बारिश को छोड़ दिया जाय तो सिचाई नहरों के द्वारा होती थी। लेकिन अब इन नहरों का अस्तित्व ही खत्म होता दिख रहा है इसकी प्रमुख कारण है नहरों की सफाई नहरें जब तक साफ नही होंगी तब तक किसानों के खेतों तक पानी नही पहुंच पाएगी।

वहीं किसान अब भी आस लगाए बैठे हैं कि पानी अब आएगी लेकिन सवाल ये उठता है कि कब जनपद की सिचाई ब्यवस्था कब सही होगी ,कब खेतो में आएंगे पानी आखिर कब तक होगी समस्या का समाधान ? यही सवाल अब किसानों के जेहन में चल रही है क्यों की जिले के सभी सागरों में पानी न होने से अब नहरों में पानी नहीं आ रहे है और वही रब्बी फसलों की बुआई चल रही है।

सिद्धार्थनगर जनपद जहा की सिचाई की ब्यवस्था ब्रिटिश काल में अंग्रेजों द्वारा बजहा,महसईया, मर्थी मौझौली, बटुआ सागर जैसे कई सागरों का निर्माण कराया गया था कि किसान नहरों के माध्यम से सिंचाई कर सके लेकिन अब इन सागरों में पानी ना रहने से नहरें सुखी हुई है जिससे किसानो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है |

जनपद में गेहूं की फसल की बुआई चल रही है और अब सिचाई की जरुरत अधिक पड़ रही है वही लगभग 70℅ गेहूं की खेती की जाती है इस फसल के लिए शुरुआती दौर के समय में पानी की जरुरत होती है अब किसानों की परेशानी लाजमी है। वहीं जब किसानों से बात की गई तो उनकी परेशानी अनेक तरह से दिखी सिंचाई के साथ साथ खाद की भी परेशानी सामने आ रही है ,खादों के निर्धारित मूल्य से अधिक रुपये लिए जा रहे है जबकि गेहूं की बुआई चरम सीमा पर चल रही है ऐसे में किसानों का शोषण रुकने का नाम नही ले रहा है।और वहीं जिमेदार मूक दरसक बने हुए है और रटा रटाया जवाब दे रहे हैं।

इस विषय पर जब सिचाई विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो उनके द्वारा ज्ञात हुआ कि हमारी सागरों में पर्याप्त मात्रा में पानी है अभी नहरों की सफाई चल रही है और 10 दिसम्बर से सभी नहरों में पानी पहुच जाएगा।जब कि ये सिर्फ कहने की बात है आप साफ तौर पर देख सकते हैं कि नहरों की क्या हालत है ऐसे में आप खुद अंदाज लगा सकते हैं कि किसानों की हालत का जिम्मेदार कौन है।

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