राजस्थान: बागियों ने बढ़ाई मुख्यमंत्री राजे की मुसीबत

जयपुर के मालवीय नगर से मौजूदा चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ, झोटवाड़ा से उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, परिवहन मंत्री यूनुस खान और चुरू की रतनगढ़ सीट से देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां जैसे लोगों के नाम पहली सूची में नहीं हैं. आशंका जताई जा रही है कि ये सभी दिग्गज नेता बीजेपी को अलविदा कह सकते हैं.

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राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होने के बाद पार्टी में बगावत के सुर तेज हो गए हैं. ऐसे में पहले से ही सत्ता विरोधी लहर झेल रहीं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने चुनाव के ठीक पहले पार्टी नेताओं की नाराजगी दूर करने की भी चुनौती खड़ी हो गई है.

बीजेपी को सबक सिखाने में जुटे बागी

रविवार रात बीजेपी उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होने के बाद पार्टी में इस्तीफों की बाढ़- सी आ गई है, कई दिग्गज नेता इस लिस्ट में जगह बना पाने असफल रहे. राजस्थान सरकार में मंत्री और पांच बार से विधायक सुरेंद्र गोयल ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए चेतावनी दी है कि वे बीजेपी को बर्बाद कर देंगे. गोयल पाली जिले की जैतारण सीट से विधायक थे, उन्होंने कहा है कि वे जैतारण से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे.

वहीं नागौर से विधायक हबीबुर्रहमान ने भी टिकट कटने से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी है. हबीबुर्रहमान बीजेपी से पांच बार विधायक रह चुके हैं और माना जा रहा है कि वो कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. वहीं बीजेपी के पूर्व महासचिव कुलदीप धनकड़ ने भी उपेक्षित होने के कारण सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया. धनकड़ जयपुर ग्रामीण की विराट नगर सीट से अपना दावा ठोंक रहे थे. अब वो भी निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं.

वहीं कोटा की रामगंज मंडी सीट से मौजूदा विधायक चंद्रकांता मेघवाल का टिकट काटकर इस बार संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले मदन दिलावर को टिकट दिया गया है. चंद्रकांता मेघवाल ने भी निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है. इसी तरह सादड़ी से गौतम दक, डूंगरपुर से देवेंद्र कटारा, किशनगढ़ से भागीरथ चौधरी और सागवाड़ा से अनीता कटारा भी बगावती रुख अख्तियार किए हुए हैं.

दिग्गजों के नाम न होने से असमंजस की स्थिति

इसके अलावा जिन बड़े नेताओं के नाम पहली सूची में नहीं हैं उनमें जयपुर के मालवीय नगर से मौजूदा चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ, झोटवाड़ा से उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, परिवहन मंत्री यूनुस खान और चुरू की रतनगढ़ सीट से देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां का नाम शामिल है. आशंका है कि ये सभी बीजेपी से किनारा कर सकते हैं.

मंत्री यूनुस खान राजे सरकार में नंबर दो की हैसियत रखते हैं और नागौर की डिडवाना सीट से विधायक हैं. आज तक से बातचीत में यूनुस खान ने कहा है कि वो राम मंदिर आंदोलन के समय से बीजेपी के साथ जुड़े हैं और मुख्यमंत्री राजे ने उन्हें टिकट के लिए चिंता न करने का भरोसा दिलाया है और उन्हें आलाकमान के फैसले का इंतजार है.

डैमेज कंट्रोल में जुटी बीजेपी

इस बीच पार्टी नेताओं की नाराजगी और मतभेद दूर करने के लिए केंद्रीय मंत्री और चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक गजेंद्र सिंह शेखावत को लगाया गया है. सोमवार को जयपुर स्थित पार्टी मुख्यालय में नाराज बीजेपी कार्यकर्ताओं ने काफी हंगामा किया. दूर से आए कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए शेखावत ने काफी मान मनौव्वल भी की लेकिन उनकी कोशिश असफल रही और अंत में हंगामा बढ़ते देख कार्यालय में पुलिस तैनात करनी पड़ी.

पहली सूची में किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं देने के सवाल पर राजस्थान चुनाव प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने कहा है कि उम्मीदवारों की अगली सूची लंबित है और एक बार सूची जारी हो जाने के बाद ही वे इस मुद्दे पर बात करेंगे. पार्टी में मुखर हो रहे बगावती सुर पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि इन मतभेदों से लड़ने के लिए सभी को साथ बैठना होगा.

आपको बता दें कि बीजेपी की ओर से कराए गए आंतरिक सर्वे में सीटों को तीन श्रेणी में बांटा गया है. इस सर्वे के मुताबिक राजस्थान की 137 सीट विधानसभा सीटों को B और C की श्रेणी में रखा गया है. जिनके बारे में कहा जा रहा था कि इनमें से 100 सीटों पर नए चेहरों को टिकट थमाए जा सकते हैं लेकिन पार्टी को बगावत का अंदेशा पहले से ही हो गया. यही वजह रही कि पहली सूची में टिकट कटने वालों की संख्या उतनी नहीं रही जितनी उम्मीद थी.

फिर भी यदि बागियों ने हर सीट पर बीजेपी के वोट काटे तो पार्टी उम्मीदवारों की जीत मुश्किल हो सकती है. लिहाजा पहले से ही अपने खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही वसुंधरा राजे को वापसी करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

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