मुश्किल है जयपुर की डगर, सचिन-राहुल की जोड़ी कर पाएगी मैजिक?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज जयपुर के दौरे पर हैं. उनका यहां रोड शो होना है और इसे कांग्रेस के चुनाव प्रचार का आगाज माना जा रहा है. जयपुर जिले में कुल 19 विधानसभा सीटें आती हैं और यहां बीजेपी का कब्जा रहा है.

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राजस्थान की भूमि पर चुनावी रण का आरंभ हो गया है. सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार का जिम्मा स्वयं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे संभाल रही हैं और कांग्रेस के चुनाव प्रचार को आज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी हरी झंडी दिखाने जयपुर पहुंच रहे हैं. यानी कांग्रेस के चुनावी बिगुल का शंखनाद जयपुर की धरती से हो रहा है.

ये पहला मौका है जब कांग्रेस पार्टी की कमान मिलने के बाद राहुल जयपुर पहुंच रहे हैं और बाकायदा वहां रोड शो कर रहे हैं. जयपुर न सिर्फ राज्य की राजधानी है, बल्कि सीटों के लिहाज से भी यह जिला सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और इस पर कांग्रेस की नजर है. राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट भी कह चुके हैं कि वह जयपुर में मजबूत होने वाले भाजपा के दावे को झूठा साबित कर देंगे.

हालांकि, पायलट ने जयपुर को लेकर एक और वजह भी बताई. उनके अनुसार पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद गांधी पहली बार प्रदेश यात्रा पर आ रहे हैं और यह वही शहर है जहां से उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था. इस कारण से कांग्रेस पार्टी के लिये जयपुर एक महत्वपूर्ण स्थान है.

जयपुर जिले का गणित

जयपुर जिले में कुल 19 विधानसभा सीटें हैं. इनमें से 14 सीटें सामान्य हैं, 3 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई हैं.

13 तहसील वाले इस जिले में करीब 87 फीसद हिंदू आबादी है. जबकि 10 फीसद के करीब मुस्लिम जनसंख्या हैं. जिले में अनुसूचित जाति की आबादी 15.1% और अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 8% है.

शहरी और ग्रामीण आबादी के लिहाज से देखा जाए इस जिले में 52.4% लोग शहरी क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि ग्रामीण आबादी 47.6% है. आमतौर पर शहरी आबादी में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत माना जाता है. चुनाव नतीजे भी इसकी पुष्टि करते नजर आते हैं. राज्य के पिछले दो विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो जयपुर जिले में भी परिणाम बीजेपी के पक्ष में ही गए हैं.

2008 विधानसभा चुनाव का रिजल्ट (जयपुर)

इस चुनाव में जिले में कुल 35,38,921 मतदात थे और 22,58,054 (63.8%) लोगों ने अपने मतों का इस्तेमाल किया था. बीजेपी को 39.4%, कांग्रेस को 37.8%, निर्दलीयों को 16% और बहुजन समाज पार्टी को 3.1% वोट मिले थे. जबकि सबसे ज्यादा 10 सीटें बीजेपी ने जीती थीं.

बीजेपी- 10 सीट

कांग्रेस- 7 सीट

लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी- 1 सीट

निर्दलीय- 1 सीट

2013 विधानसभा चुनाव का रिजल्ट (जयपुर)

इस चुनाव में जिले में कुल 39,11,600 मतदात थे और 28,76,745 (73.5%) लोगों ने अपने मतों का इस्तेमाल किया था. बीजेपी को 47.6% और कांग्रेस को 34.2% वोट हासिल हुए थे. जबकि 8.8% वोट निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गए थे. नेशनल पीपुल्स पार्टी ने कुल 7 फीसदी वोट पाए थे.

बीजेपी- 16 सीट

कांग्रेस- 1 सीट

निर्दलीय- 1 सीट

नेशनल पीपुल्स पार्टी- 1 सीट

2008 के चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसे 96 सीटें मिली थीं. जबकि बीजेपी को 78 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. 17 अन्य के अलावा बीएसपी को 6 और सीपीएम को 3 सीटों पर जीत मिली थी. कांग्रेस ने अशोक गहलोत के नेतृत्व में राजस्थान में सरकार बनाई थी, लेकिन जयपुर जिले में बीजेपी ने कांग्रेस पर लीड कायम रखते हुए कांग्रेस से 3 सीट ज्यादा जीती थीं.

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इसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में जब सत्ता विरोधी लहर चली तो बीजेपी ने पूरे राज्य सहित जयपुर जिले में लगभग क्लीन स्वीप कर दिया. कुल 200 विधानसभा सीटों में 163 पर बीजेपी को जीत मिली और जयपुर की 19 सीटों में से 16 सीटों पर उसके उम्मीदवारों ने परचम लहराया. जयपुर में कांग्रेस महज एक सीट ही हासिल कर पाई. इस तरह जब बीजेपी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया तो जयपुर जिले की ज्यादातर सीटों पर उसके उम्मीदवार जीते और कांग्रेस धराशाई हो गई.

ऐसा ही कुछ 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में देखने को मिला था. जहां सूरत जिले की 18 सीटों में कांग्रेस सिर्फ 3 सीटों पर जीत पाई थी, जो बीजेपी की सत्ता वापसी में एक बड़ा फैक्टर साबित हुई थी और उसे 15 सीटें मिली थीं. जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस को उम्मीद से बेहतर नतीजे मिले थे. सूरत का जिक्र इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वहां चुनाव में सबसे अहम भूमिका अशोक गहलोत ने निभाई थी. गहलोत के प्रदर्शन से राहुल गांधी संतुष्ट भी नजर आए थे, जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में अहम जिम्मेदारी दी गई. हालांकि, राजस्थान में प्रत्यक्ष तौर पर कमान अशोक गहलोत के हाथों में नहीं है, लेकिन उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रहा है.

ऐसे में अब देखना होगा कि सचिन पायलट के नेतृत्व में उपचुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर रही कांग्रेस जयपुर फतह करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है. ये भी देखना दिलचस्प होगा कि अशोक गहलोत जैसे बड़े रणनीतिकार की मौजूदगी में कांग्रेस के युवा नेताओं राहुल और सचिन पायलट की जोड़ी जयपुर के शहरी आबादी को कितना प्रभावित कर पाती है.

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