भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार में गिरावट, दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत

कमजोर रुपये से 7.1 फीसदी पर टिकी भारत की विकास दर

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वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी दर घटकर 7.1 फीसदी रह गई। यह पहली तिमाही में 8.2 फीसदी थी। इस हिसाब से इसमें 1.1 फीसदी की कमी देखने को मिली है।
आर्थिक सलाहकारों की माने तो जीडीपी में यह कमी दो मुख्य कारणों से आई है। पहला डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार कमजोर होना और दूसरा आईएलएंडएफएस में नकदी सकंट, जिसकी वजह से निवेश पर असर देखने को मिला।
केंद्रीय सांख्यिकी कायार्लय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक सकल मूल्य व्द्धिधत (जीवीए) दर जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़कर 6.9 फीसदी रही है, जोकि पिछली तिमाही की 8 फीसदी की तुलना में कम है। वित्तवर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में जीवीए की दर 6.1 फीसदी रही थी।

वहीं आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर अक्तूबर माह में घटकर 4.8 प्रतिशत रह गई। पिछले साल इसी अवधि में यह पांच प्रतिशत थी। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस तथा उर्वरक के उत्पादन में कमी से आठ बुनियादी क्षेत्र के उद्योगों की वृद्धि दर अक्तूबर में कुछ धीमी पड़कर 4.8 प्रतिशत रही। आठ बुनियादी क्षेत्रों… कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर एक साल पहले अक्तूबर में 5 प्रतिशत रही थी।

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