देश के ज्यादातर इलाके पानी-पानी, जानें- बाढ़ को लेकर क्यों है ऐसी बेबसी

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मानसूनी बारिश, भारतीय कृषि की जीवनरेखा है। किसान जहां एक तरफ घने बादलों का इंतजार करते हैं, वहीं सरकार की उम्मीदें भी बेहतर मानसून पर टिकी होती हैं। लेकिन मानसूनी बारिश का एक दूसरा पक्ष भी है। जुलाई से लेकर सितंबर तक देश का करीब करीब हर कोना बाढ़ की समस्या का सामना करता है। हालांकि इसके पीछे सिर्फ बारिश ही नहीं जिम्मेदार है। उदाहरण के तौर पर यूपी, बिहार के नेपाल सीमा से सटे इलाकों को देखें तो वहां पर बाढ़ के लिए मानसूनी बारिश से ज्यादा कहीं नेपाल द्वारा छोड़ा गया पानी जिम्मेदार होता है। सरकारें हर वर्ष बाढ़ की चुनौती का सामना करने के वादे और दावे करती हैं, लेकिन हकीकत ये है कि बाढ़ की चुनौती अगली बारिश के साथ दस्तक देने लगती है। ऐसे में सवाल ये है कि भारत में इन दो से तीन महीनों में जल प्रलय के पीछे क्या सिर्फ मानसूनी बारिश ही जिम्मेदार है या सरकारी व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। लेकिन बाढ़ की वजहों पर विचार करने से पहले उन इलाकों पर नजर डालने की जरूरत है, जहां बाढ़ की वजह से आम जनजीवन प्रभावित है।

बाढ़ से बिहार बेहाल

नेपाल की बारिश ने कोसी-सीमांचल व उत्तर बिहार को तबाह कर दिया। बाढ़ से अब तक 50 लोगों से अधिक की मौत हो चुकी है। नदियों में उफान से 12 जिलों में हालात बेकाबू हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राज्य के बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया। उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से बाढ़ की स्थिति पर बात की और केंद्र से हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

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