दिल्ली के जामिया नगर में मेल बढ़ाते मस्जिद मंदिर!

दिल्ली के जामिया नगर की सानिया लिखती हैं कि उनके घर के पास मौजूद हलाल मीट शॉप नवरात्र के दिनों में दुकान पर काला पर्दा टांगकर पर्दे के पीछे बिक्री करता हैं. ऐसा इसलिए कि इलाके के अल्पसंख्यक हिंदू घरों में नवरात्र का व्रत रखा जाता है.

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मुसलमान औ’ हिन्दू है दो, एक, मगर, उनका प्याला,

एक, मगर, उनका मदिरालय, एक, मगर, उनकी हाला,

दोनों रहते एक न जब तक मस्जिद मन्दिर में जाते,

बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर मेल कराती मधुशाला!

हरिवंश राय बच्चन की लिखी इन पंक्तियों में मंदिर मस्जिद बैर कराते, मेल कराती मधुशाला को भारतीय समाज का आइना मान लिया गया है. यह आइना झूठ भी बोलता है, ऐसा साक्ष्य समय-समय पर समाज के बीच से ही निकलकर आता है. देश के प्रमुख संप्रदायों में आपसी अविश्वास और धर्म की आड़ में होने वाली हिंसा मानवता की नींव को हिलाने का काम सतत करती रहती है, लेकिन एक छोटा सा वाक्या भी इस अविश्वास और हिंसा के पैरों तले जमीन खींचने का काम करता है.

ये वाक्या सोशल मीडिया पर सामने आया. पेशे से खबरों की मार्केटिंग में माहिर सानिया अहमद हसन ने अपने फेसबुक वॉल पर वो लिखा जो दिखाई दिया. दिल्ली के मुस्लिम बाहुल जामिया नगर में रहने वाली सानिया ने शेयर किया कि उनके इलाके में जहां हर किलोमीटर पर एक मस्जिद है वहीं इन मस्जिदों के बीच एक मंदिर भी है. इस मंदिर में इलाके की हिंदू आबादी पूजा-पाठ करने के लिए आती है. वहीं जब दिन नवरात्र के हों, तो मंदिर में दिनभर भजन-कीर्तन होता रहता है.

लेकिन क्या मस्जिदों के बीच स्थित इस मंदिर में दिनभर चल रहे भजन-कीर्तन और घंट-घड़ियाल की गूंज से बैर फैल रहा है? वैसा बैर जिसका जिक्र हरिवंश अपनी पंक्तियों में करते हैं. सानिया आगे लिखती हैं, दिन में जब-जब अजान का  समय होता है, मंदिर में भजन, कीर्तन और घंट-घड़ियाल की आवाज रुक जाती है.

सानिया आगे लिखती हैं कि उनके घर के पास मौजूद हलाल मीट शॉप नवरात्र के दिनों में दुकान पर काला पर्दा टांगकर पर्दे के पीछे बिक्री करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इलाके के हिंदू घरों में नवरात्र का व्रत रखा जाता है लिहाजा इन पवित्र दिनों में किसी को ठेस न पहुंचे.

अंत में सानिया लिखती हैं कि ये मिलजुल कर एक रहने की खूबसूरत मिसाल है. सानिया की इस अंतिम पंक्ति को रामधारी सिंह दिनकर की संस्कृति के चार अध्याय के तीसरे अध्याय हिंदू संस्कृति और इस्लाम प्रत्येक पंक्ति में लिखा गया है.

इसी अध्याय में दिनकर भी लिखते हैं भारत में पठानों और मुगलों का आगमन व्यापार अथवा उपनिवेश बसाने के लिए नहीं हुआ. वे यहां बसने आए उनसे पहले आने वाली तमाम विदेशी जातियों की तरह उनका स्वागत हुआ. लेकिन मुसलमानों से पहले किसी ने यहां बसने के लिए भारत को अपना देश नहीं माना. यही कारण है कि शक और हूण को भारत में राजनीतिक प्रबलता नहीं मिली और मुसलमानों ने छह सौ वर्षों तक सत्ता चलाई. वहीं शक और हूण हिंदुत्व में समा गए और मुसलमान मुसलमान रहा और हिंदू हिंदू रहा. फिर फारसी और संस्कृत में जो तालमेल बैठा कि आज लगता है कि संस्कृत में आए फारसी शब्दों को खुद पाणिनि लिख कर गए हैं.

 

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