दिग्गज अभिनेता कादर ख़ान का निधन, दुनिया से चला गया एक जीनियस

कादर ख़ान अपने अभिनय ही नहीं अपनी लेखनी के लिये भी हमेशा याद किये जाते रहेंगे! उनके मौत को लेकर कई बार अफ़वाह भी उड़ते रहे..

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मुंबई। दिग्गज अभिनेता कादर ख़ान का निधन हो गया है। 81 साल के ख़ान अपने बेटे सरफ़राज़ के साथ कनाडा में रह रहे थे। सरफ़राज़ के मुताबिक 31 दिसंबर शाम 6 बजे ही कादर ख़ान के निधन की पुष्टि हो गई थी! उनका अंतिम संस्कार वहीं कनाडा में ही होगा! गौरतलब है कि शुक्रवार को ही ख़बर आई थी कि गंभीर रूप से बीमार होने के बाद उन्हें बाइपेप वेंटीलेटर पर रखा गया था। 81 कादर ख़ान प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर (पीएसपी ) के शिकार हो गए थे और इसकी वजह से उनके मस्तिष्क ने काम करना बंद कर दिया था!

इस ख़बर के बाद अब उनके मौत की ख़बर से बॉलीवुड सदमे में है। तकरीबन एक दशक से ख़बरों से दूर अभिनेता कादर ख़ान का बचपन बहुत ही संघर्ष भरा रहा है और बाद के दिनों में उन्होंने बड़ी ही लगन और समर्पण से बॉलीवुड में अपनी एक पहचान बनाई। सिर्फ़ अभिनय ही नहीं बल्कि लेखनी में भी उनका जादू खूब दिखा। एक दौर ऐसा भी रहा जब अमिताभ बच्चन तक के संवाद भी कादर ख़ान ही लिखा करते थे।

अभिनेता के रूप में 1973 में अपने करियर की शुरुआत करने के बाद से उन्होंने लगातार 300 से अधिक फ़िल्मों में काम किया। जिनमें उनकी डेब्यू फ़िल्म ‘दाग’ के अलावा ‘खून पसीना’, ‘बुलंदी’, ‘नसीब’, ‘याराना’, ‘सत्ते पे सत्ता’, ‘हिम्मतवाला’, ‘घर संसार’ से लेकर ‘हीरो नंबर 1’ तक हर तरह की फ़िल्में कीं। विलेन से लेकर चरित्र अभिनेता और हास्य अभिनेता तक उन्होंने अपने अभिनय के हर रंग बड़े पर्दे पर जीवंत किये। अभिनय के अलावा उन्होंने 250 फ़िल्मों में संवाद भी लिखे। कादर ख़ान के करियर की शुरुआत थियेटर से हुई। थियेटर शुरू करने के कुछ महीनों में ही कादर ख़ान अपने काम की वजह से काफी लोकप्रिय हो गए। उसी दौरान एक मंडली वाले उनके पास आई कि वो उनके कार्यक्रम में आकर प्ले करे। कादर ख़ान वहां गए और फिर ऐसा हुआ कि बेस्ट एक्टर से लेकर बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट राइटर का भी पुरस्कार जीतकर कादर ख़ान ने तहलका मचा दिया! बॉलीवुड के भी कई फ़िल्मकार यह नाटक देखने आये थे और वहीं कादर ख़ान को एक फ़िल्म ‘जवानी दीवानी’ में संवाद लिखने का काम मिल गया। यह साल 1972 की बात है।

उसके बाद उन्होंने ‘बेनाम’, रोटी’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘परवरिश’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘सुहाग’, ‘नटवरलाल’, ‘याराना’, ‘लावारिस’ से ;लेकर ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ समेत 250 फ़िल्मों के लिए लिखा। राजेश खन्ना की सुपरहिट फ़िल्म ‘रोटी’ के लिए उन्हें 1974 में एक लाख बीस हज़ार की रकम मिली थी। यह रकम तब बहुत बड़ी मानी जाती थी। ‘अंगार’ और ‘मेरी आवाज़ सुनो’ के लिए फ़िल्मफेयर से बेस्ट संवाद के लिए पुरस्कार जीतने वाले कादर ख़ान को 10 बार फ़िल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन के अवार्ड लिए भी चुना गया।

हिंदी सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए साल 2013 में उन्हें साहित्य शिरोमणि पुरस्कार भी प्रदान किया गया। कादर ख़ान ने निर्माता के रूप में भी एक फ़िल्म बनाई थी साथ ही छोटे पर्दे पर भी उनका शो ‘हँसना मत’ काफी लोकप्रिय रहा। कादर ख़ान सही मायने में एक जीनियस थे। उनके जैसा हरफनमौला कलाकार शायद ही कोई दूसरा हो।

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