तो लोग यह सोचना शुरु कर देंगे कि उन्हें मुस्लिमों और ईसाइयों से नफरत करनी चाहिएः मलाला

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नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित पाकिस्तान की साहसी युवती मलाला यूसुफजई ने कहा कि युवा सोशल मीडिया को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करें, ताकि समाज में फैली असमानता, महिला अधिकार और शिक्षा जैसी जन समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया जा सके। समाचार एजेंसी एफे की खबर के मुताबिक, गुरुवार को मोंटेरेरी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और एंड हाइयर एजुकेशन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए 20 साल की इस सामाजिक कार्यकर्ता ने सोशल नेटवर्क और मीडिया में फैले पक्षपात के बारे में चेताया भी।

मलाला ने कहा कि अगर पक्षपात ऑनलाइन भी बना रहता है, तो लोग यह सोचना शुरू कर देंगे कि उन्हें मुस्लिमों, मैक्सिकनों और ईसाइयों से नफरत करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें तकनीक का शुक्रिया अदा करना चाहिए, जिसकी बदौलत दुनिया के तमाम देशों की राजनीति में युवा अब बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया अकाउंट पर अक्सर आने वाली अज्ञात लोगों की टिप्पणियों पर मलाला ने कहा कि ऐसे लोग गलत काम कर रहे हैं। वे खुलकर सामने आएं और बेहिचक बोलें।

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