तरुण सागर का निधन: जैन मुनि के वो 10 बयान, जो बने विवाद का केंद्र

जैनमुनि तरुण सागर ने मुस्लिम आबादी से लेकर तीन तलाक और आरक्षण से लेकर फर्जी बाबाओं पर सख्त टिप्पणी कर चुके हैं. वह राजनेताओं पर निरंतर टिप्पणी करते रहते थे और बाकी संतों को भी लोकसभा व राज्यसभा जाकर प्रवचन करने की नसीहत देते थे.

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जैनमुनि तरुण सागर का 51 साल की उम्र में निधन हो गया है. उन्होंने दिल्ली के कृष्णा नगर में अंतिम सांस ली. आज दोपहर बाद दिल्ली-मेरठ हाइवे के पास उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. तरुण सागर पीलिया से बीमार थे, जिसके बाद उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी.

तरुण सागर एक संत होने के साथ ही देश-दुनिया के मुद्दों पर भी अपनी राय रखते थे. यहां तक कि देश की राजनीति में भी दखल रखते थे. वह दिल्ली से लेकर हरियाणा विधानसभा में उपदेश भी दे चुके हैं. हालांकि, कई बार उनके बयानों को लेकर विवाद भी हुआ है.

आतंकवाद पर एक बार उन्होंने कहा था कि जितने आतंकवादी पाकिस्तान में नहीं हैं, उससे ज्यादा गद्दार हमारे देश में मौजूद हैं. उन्होंने कहा था कि गद्दारों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि आंतरिक आतंकवाद खत्म हो सके.

अपने एक बयान में उन्होंने ये भी कहा था कि देश के कुछ मुसलमान ऐसे हैं, जिनका हिंदुस्तान में मन नहीं लगता उन्हें पाकिस्तान भेज देना चाहिए. साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि जिन हिंदुओं का पाकिस्तान में मन नहीं लगता उन्हें हिंदुस्तान बुला लेना चाहिए.

तीन तलाक पर दिया था बयान

बीते 10 अगस्त को उन्होंने मुस्लिम महिलाओं से जुड़े तीन तलाक के मुद्दे पर भी बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि जो लोग मुस्लिम महिलाओं के कल्याण का दावा कर रहे हैं, वह महज दिखावा है, ऐसे नेताओं या दलों को महिलाओं के हक से कोई लेना-देना नहीं है, वह बस अपनी राजनीति कर रहे हैं.

एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि देश में हर तीसरा व्यक्ति भ्रष्टाचारी है. जैनमुनि ने कहा था कि देश के 10 फीसदी लोग ही पूरी तरह ईमानदार हैं.

नेताओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने ये भी कहा था कि छोटी चोरी करने वाले जेलों में बंद हैं और जो बड़ी-बड़ी चोरियां करते हैं वो लोकसभा और विधानसभा में बैठे हुए हैं.

प्रवचन दें संत

जैनमुनि तरुण सागर अक्सर राजनेताओं पर चोट करते थे. उन्होंने एक बार कहा था कि अगर लोकसभा विधानसभा में बैठने वाले लोग सुधर जाएं, तो एक अरब 34 करोड़ 97 लाख लोग भी सुधर जाएंगे.

सदन में संत के प्रवचन का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा था कि संतों को अब जनता के बीच प्रवचन नहीं करने चाहिए बल्कि राजनेताओं के लिए लोकसभा व विधानसभा में प्रवचन करने चाहिए, क्योंकि सबसे ज्यादा जरूरत वहीं है.

लव जिहाद पर भी विवादित बयान

लव जिहाद जैसे बड़े विवादित मुद्दे पर भी जैनमुनि ने अपनी राय रखी. उन्होंने लव जिहाद को मुसलमानों की साजिश बताते हुए कहा था कि झूठे प्यार के नाम पर हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा था कि अगर लव जिहाद को नहीं रोका गया तो कुछ दिनों में भारत दूसरा पाकिस्तान बन जाएगा.

मुस्लिम आबादी देश के लिए खतरा

मुसलमानों की आबादी पर भी तरुण सागर के बयान से विवाद हो गया था. उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों की बढ़ती आबादी देश के लिए खतरा है. साथ ही वो मुस्लिम भी देश के लिए खतरा हैं, जो ये कहते हैं कि भारत तेरे टुकड़े होंगे और भारत की हार पर जश्न मनाते हैं.

फर्जी बाबा के खिलाफ

तरुण सागर ने दशहरा के मौके रावण की जगह दुष्कर्मी बाबाओं के पुतले जलाने की बात भी कही थी. उन्होंने कहा था कि दशहरा तभी सार्थक होगा जब हम सब एक साथ मिलकर इन फर्जी बाबों के खिलाफ खड़े हो जाएंगे. वो कहते थे कि जिन बाबाओं पर अदालत में दुष्कर्म के आरोप सिद्ध हो गए हैं उन सभी का पुतला बनाकर दशहरे पर दहन करना चाहिए जिससे सामाज में एक सन्देश जा सके.

आरक्षण के खिलाफ

तरुण सागर आरक्षण के खिलाफ थे. उन्होंने कहा था कि यह देशहित में नहीं है और योग्यता एवं पात्रता के आधार पर ही आरक्षण होना चाहिए, तभी देश का भला होगा. उन्होंने कहा था कि पूरे देश में आरक्षण को लेकर आंदोलन हो रहे हैं, यह अच्छी परंपरा नहीं है.

बता दें कि जैनमुनि तरुण सागर नेताओं को प्रवचन देने के पक्षधर थे. उनका मानना था कि संत समाज का गुरू होता है, पूरे समाज का दायित्व उसपर होता है. समाज में गलत को गलत बोलना कोई गुनाह नहीं है.’ राजनीति में आने पर उन्होंने कहा था कि सियासत से उनका कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा था कि अगर मैं प्रधानमंत्री भी बन जाता हूं तो क्या, मैं जो बन गया हूं प्रधानमंत्री भी आकर मुझे नमस्कार करेगा, प्रणाम करेगा और अनुनायियों की बड़ी संख्या के साथ आज वो इस दुनिया से विदा हो गए.

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