तंदूर पर रोटी लगाने वाले गरीब दंपति का बेटा बना जज ।

जिला फाजिल्का के अबोहर की आनंद नगरी के गरीब परिवार का बेटा आज जुडिशल टेस्ट में पास होकर जज बन गया है यह परिवार बहुत ही गरीब है जज बने अजय राठौड़ के माता पिता घर में तंदूर लगाकर टिफन पैकिंग का काम करते हैं

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गरीब परिवार का बेटा आज जुडिशल टेस्ट में पास होकर जज बन गया है

जिला फाजिल्का के अबोहर की आनंद नगरी के गरीब परिवार का बेटा आज जुडिशल टेस्ट में पास होकर जज बन गया है यह परिवार बहुत ही गरीब है जज बने अजय राठौड़ के माता पिता घर में तंदूर लगाकर टिफन पैकिंग का काम करते हैं जिसमें थोड़ी आमदन होने के चलते उनको अजय की पढ़ाई में काफी दिक्क़ते आई लेकिन मेहनत और लगन के चलते आज अजय राठौर ने जुडिशल एक्जाम पास करके सारे समाज को बता दिया कि आर्थिक तंगी मेहनत करने वालों के आड़े नहीं आती रिजल्ट आने के बाद जहां अजय राठौर के घर पर बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है वही अजय के मां बाप की आंखों में खुशी के आंसू संभले नहीं जा रहे ।

जज बने अजय राठौड़ ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते वह दसवीं कक्षा पास कर के फिर अबोहर कोर्ट में एक वकील के पास मुंशी के तौर पर काम करने लगा काम के दौरान जब वह सामने बैठे किसी जज को देखता तो उसके मन में भी आती कि काश मैं भी इस कुर्सी पर कभी बैठ पाऊंगा तो उसने मन में ठान लिया कि जैसे भी हो मैं जज बन के रहूंगा तो अजय ने मुंशी की नौकरी के साथ प्राइवेट तौर पर अपनी पढ़ाई जारी रखें जिसमें उसने बारहवीं कक्षा के साथ साथ एल एल बी भी किया और उसकी कई जच अधिकारियों व वकील दोस्तों ने किताबें देकर काफी मदद की जहां बॉर्डर एरिया पर कोई कोचिंग की सुविधा ना होने के कारण वह अकेले ही दिन रात पढ़ाई में मगन रहा जिसके चलते उसने दूसरी बार यह एग्जाम दिए तो आज वह पास हो गया और अपना वह अपने मां बाप का सपना पूरा कर दिखाया ।

अजय राठौड़ के पिता बलबीर सिंह व माता आशा जो अपने घर में ही एक छोटी सी दुकान में तंदूर पर रोटियां बना कर टिफन पैक का काम करते हैं उन्होंने बताया कि हमारे बेटे का सपना था कि मैं जरूर अपने पांव पर खड़ा होकर कुछ बन पाऊंगा और आज इस ने हमारा सपना पूरा कर दिया हम और भी लोगों को सलाह देते हैं कि पढ़ाई ही ऐसी चीज है जिससे आदमी कुछ भी बन सकता है अगर वह मेहनत व लगन से पढ़ाई करे तो कुछ भी बन सकता है ।

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