उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को स्थानीय भैंसासुर घाट पर काशी के देव दीपावली की आलौकिक छटा देख भाव विह्वल एवं आनंदित हुए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जोर देते हुए कहा कि काशी के सांसद एवं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे आज काशी में देव दीपावली के अवसर पर काशी की छवि देखने को मिल रही है,

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को स्थानीय भैंसासुर घाट पर काशी के देव दीपावली की आलौकिक छटा देख भाव विह्वल एवं आनंदित हुए। उन्होंने मौके पर मौजूद विशाल संख्या में पधारे काशीवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि काशी के गंगा घाटों को आपस में जोड़ने, काशी के धर्म स्थलों के साथ-साथ श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के विकास कार्य को पावन पथ योजना के तहत क्रियान्वित कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जोर देते हुए कहा कि काशी के सांसद एवं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे आज काशी में देव दीपावली के अवसर पर काशी की छवि देखने को मिल रही है, ऐसे ही छटा काशी का रोजाना हो, वह चाहते हैं। उन्होंने कहा कि काशी के भौतिक विकास का 4.5 वर्ष में जो कार्य हुआ है, वह अब काशीवासियों के साथ- साथ पूरे देश के लोगों को दिखाई पड़ने लगा है। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावनाओं के अनुरूप काशी के आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए यहां पर भौतिक विकास युद्ध स्तर पर कराया रहा है। मुख्यमंत्री ने काशी को काशी के अनुरूप विकसित करने में काशीवासियों को अपना योगदान किए जाने की भी जोरदार अपील की।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्वलित कर देव दीपावली कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। काशी की देव दीपावली विश्व प्रसिद्ध है और आलौकिक एवं अदृश्य छटा को देखने के लिए पूरी दुनिया से भारी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। दीपावली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन सभी देवता गंगा के किनारे दीपावली मनाने आते है। लिहाज़ा सभी घाटों और कुंड की विधिवत सफाई की जाती है। फिर दीयों से इनका श्रृंगार होता है, जिसका नज़ारा अद्भुत होता है। गंगा तट पर इस अलौकिक छटा को देखने के लिए देश-विदेश से अंसख्य पर्यटक बनारस आते हैं। गौरतलब है कि विश्व के सबसे प्राचीनतम नगरी काशी में 6000 वर्षों से जीवन की अटूट धारा का एक नाता रहा है।

यहां पर गंगा के किनारे बने अर्धचंद्राकार मुक्तासीय मंच से नजर आने वाले बनारस के घाट के किनारे मां गंगा भी उत्तर वाहिनी होकर बहती है। यह नगर जितना धार्मिक है उतना ही अधिक अध्यात्मिक भी हैं। यहां अध्यात्म प्रतीकों के रूप में प्रयोग होता है। जिसे सनातन धर्म के विभिन्न संप्रदायों ने अलग-अलग कथन में व्यक्त किया है। शैव के अनुसार त्रिपुर राक्षस को भगवान शंकर ने वध किया जिसकी खुशी के बाद शिव की नगरी काशी में देवताओं ने दीपावली मनाई।जिसे देव दीपावली कहा जाता है।

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