अयोध्या विवाद: आम चुनाव से पहले फैसला आने की उम्मीद कम

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई 20 दिन के लिए स्थगित होने से अयोध्या विवाद में फैसला लोकसभा चुनाव से पहले आने की संभावनाओं को झटका लगा है।

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई 20 दिन के लिए स्थगित होने से अयोध्या विवाद (Ayodhya dispute) में फैसला लोकसभा चुनाव से पहले आने की संभावनाओं को झटका लगा है। वहीं संविधान पीठ ने कोर्ट में केस के जो आंकड़े बयान कर उनकी विशालता का जिक्र किया, उससे साफ संकेत मिला है कि सुनवाई काफी लंबी चलेगी। जानकारों के अनुसार, फैसला कितने पन्नों का है, इस विवाद में कितने मुद्दे हैं, कितने अनुवाद किए गए हैं, कितने सबूत रखे गए और कितनी गवाहियां दर्ज हुई हैं- ये सब इससे पूर्व तय हो चुका है। इन्हें डिजिटलाइज कर सीडी में रखा जा चुका है। पक्षों में इस बात पर रजामंदी भी बन चुकी थी। पिछली पीठ ने इसे आदेश में यह रिकॉर्ड भी करवाया था कि कोर्ट में पेश किए गए अनुवादों और सबूतों पर पक्षकारों में कोई मतभेद नहीं है। इस मामले में गुरुवार को वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने संविधान पीठ के संज्ञान में यह बात रखी। रजिस्ट्री ने कुछ हिन्दी, संस्कृत, अवधी, उर्दू, फारसी और गुरमुखी के अनुवादों में अस्पष्टता की बात कही है।

साल्वे ने कहा कि यदि ऐसा है तो इस मामले में हम कोर्ट की मदद कर सकते हैं। लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ‘नहीं, हम बाहरी मदद नहीं लेंगे। रजिस्ट्री का स्टाफ और सरकारी अनुवादक दिन-रात इसकी जांच में लगे हैं और उम्मीद है कि वे 15 दिन में इसे निपटा लेंगे।’ उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान 113 मुद्दों के परीक्षण की संभावना है। यही नहीं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई के दौरान 88 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। ये बयान 2886 पन्नों में हैं और 251 दस्तावेज इसमें प्रदर्शित किए गए थे। वहीं उच्च न्यायालय का फैसला 4304 प्रिंटेड पन्नों का है और रजिस्ट्री कह रही है कि यह 8000 पन्नों में है। जानकारों ने कहा कि इससे साफ है कि कोर्ट जल्दबाजी में सुनवाई नहीं करेगा और हर दस्तावेज, सबूतों और गवाहियों की जांच करेगा।

पहले क्यों नहीं बताया

संविधान पीठ में न्यायमूर्ति यू.यू. ललित की मौजूदगी की सूचना मंगलवार 8 जनवरी को ही जारी कर दी गई थी, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इस बात को तब नहीं उठाया। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान ही इसे कोर्ट में उठाया।

जल्द फैसला देशहित में होगा : रिजवी

उच्चतम न्यायालय में अयोध्या मामले की सुनवाई टलने के बाद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गैयूरुल हसन रिजवी ने गुरुवार को कहा कि इस विवाद का जल्द फैसला देशहित में रहेगा। अयोध्या मामले के संदर्भ में रिजवी ने संवाददताओं से कहा कि यह मामला अदालत में चल रहा है। प्रधानमंत्री ने पूरे देश के सामने कह दिया है कि अदालत का निर्णय आने के बाद ही सरकार अगला कदम उठाएगी।

कोर्ट के बाहर खुशी और गम का माहौल

कई दिनों से सुनवाई की तारीख का इंतजार कर रहे लोगों में सुनवाई स्थगित होने से निराशा का माहौल फैल गया। कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट लॉन में सैकड़ों लोग सुनवाई के बाद वकीलों की ब्रीफिंग के लिए एकत्र थे। जैसे ही सुनवाई स्थगित होने की खबर आई, लोग निराश हो गए। कुछ लोग नारे लगाने लगे और कोर्ट के खिलाफ पर्चें लहराने लगे। इस दौरान पुलिस एक्शन में आई और उन्हें बसों में भर-भर कर दूर छोड़ने के लिए ले गई। वकीलों के आने पर हिन्दू पक्ष के वकील कुछ चिंतित, जबकि मुस्लिम पक्ष के वकील आश्वस्त दिखे।

कोर्ट रूम लाइव
आज सिर्फ तारीख तय होगी : मुख्य न्यायधीश

10:35 बजे पांच जजों की पीठ सुनवाई के लिए बैठी .

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन : मीलार्ड क्या मैं शुरू करूं?.

मुख्य न्यायाधीश : क्या शुरू करूं? .

धवन : सुनवाई।.

मुख्य न्यायाधीश : क्या आपने आदेश नहीं पढ़ा, आज सिर्फ तारीख तय होगी। .

धवन : तो मैं कहना चाहता हूं कि न्यायमूर्ति ललित इस मामले से जुड़े मामले में वकील रह चुके हैं, लेकिन यह न्यायमूर्ति ललित पर है कि वह इस बारे में क्या फैसला लेते हैं।.

(सभी अचंभित, जज मंत्रणा में जुटे).

न्यायमूर्ति ललित : हां, मैं अवमानना के मामले में पेश हुआ था (उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से कान में कहा- मैं हटना चाहता हूं।).

हिन्दू पक्ष के वकील हरीश साल्वे : जिस मामले की बात हो रही है वह अलग था यह मामला जमीन विवाद का है, न्यायमूर्ति ललित पेश हो सकते हैं।.

मुख्य न्यायाधीश : नहीं, न्यायमूर्ति ललित कह रहे हैं वह सुनवाई में भाग नहीं लेना चाहते। इसमें अन्य जज को शामिल करना होगा।.

धवन : मैं माफी चाहता हूं , संविधान पीठ का गठन भी प्रशासनिक आदेश से हुआ है, जबकि यह न्यायिक आदेश से होना चाहिए।.

मुख्य न्यायाधीश : माफी क्यों आपने तथ्य सामने रखा, कोई समस्या नहीं है। आप आदेश सुनिए हम मामले को 29 जनवरी के लिए स्थगित कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट रूल, 2013 के आदेश 6 और नियम एक के तहत सीजेआई को बेंचों के गठन का पूर्ण अधिकार है।.

एक वकील : सर संविधान पीठ के गठन में कुछ खामी है, यह गलत तरीके से बनी है।.

मुख्य न्यायाधीश : आपने सुप्रीम कोर्ट रूल पढ़े हैं, उन्हें पढ़िए और अगली सुनवाई पर बताइए।.

10:50 बजे : सुनवाई स्थगित, पीठ उठ गई। .

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