अब हेलमेट की कीमत एक महीने के पेट्रोल से भी होगी ज्यादा,

हेलमेट दोपहियां वाहन चालक के लिए एक अहम भूमिका निभाता है, इस बात से सभी अवगत हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं एक सस्ता हेलमेट आपकी जिंदगी तबाह करने के लिए काफी है।

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हेलमेट दोपहियां वाहन चालक के लिए एक अहम भूमिका निभाता है, इस बात से सभी अवगत हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं एक सस्ता हेलमेट आपकी जिंदगी तबाह करने के लिए काफी है। अक्सर वाहन चालक पैसे बचाने के चक्कर में 500 से 1000 रुपए तक का हेलमेट खरीद लेते हैं, लेकिन बता दें, अब हेलमेट की कीमत आपके पेट्रोल खर्च से भी ज्यादा हो सकती है।
एक सर्वे के मुताबिक हेलमेट खरीदारो की संख्या 9 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष है। सरकार ने भारतीय मानक ब्यूरो (आईएसआई) नियमों में बदलाव करके नए 2015 यूरोपियन मानक को लागू कर दिया है। जिससे हेलमेट की मैन्युफैक्चरिंग महंगी हो जाएगी।और इसका सीधा असर हेलमेट की कीमतों पर पड़ेगा।

हेलमेट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री सुभाष चंद्रा के मुताबिक इस समय हेलमेट की फैक्ट्री के साथ ही एक टेस्टिंग लैब बनायी जाती है, जहां इनका परीक्षण किया जाता था। जहां इन लैब पर इस समय 6 से 7 लाख रुपए का खर्च आता था। वहीं अब नए नियमों के अंतर्गत इस पर 1 से 2 करोड़ का खर्च आएगा। ऐसे में एक स्मॉल स्केल उद्योग चलाने वालो के लिए नई लैब लगाना आसान काम नहीं होगा और इस तरह हेलमेट की मैन्युफैक्चरिंग का काम कुछ कंपनियों तक ही सीमित रह जाएगा।

जिससे कंपनियां मनमाफिक दाम पर हेलमेट की बिक्री करेंगी। सुभाष चंद्रा ने आगे कहा कि मानक लागू होने के बाद स्मॉल स्केल हेलमेट उद्योग बंद हो सकते हैं जिससे लाखों लोगों की नौकरी भी जाएगी। इसके अलावा दोपहिया वाहन चालक इतना महंगा हेलमेट नहीं खरीद पाएंगे। इस समय हेलमेट को बनाने में मात्र 200 रुपए तक का खर्च आता है। जिसमें प्लास्टिक शेल, थर्मोकोल, कपड़ा, फोम और टेप कई चीजें प्रयोग की जाती हैं। वहीं एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री चंद्रा के मुताबिक अगर सरकार हेलमेट की क्वॉलिटी बढ़ाने पर जोर देती, तो शायद यह एक अच्छा कदम हो सकता था। लेकिन सरकार का इस समय ध्यान केवल टेस्टिंग पर है।

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